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शीतकालीन सत्र में हंगामेदार एजेंडा: परमाणु ऊर्जा से लेकर उच्च शिक्षा सुधार तक, सरकार पेश करेगी 10 बड़े बिल

Published on: November 25, 2025
Uproar agenda in winter session

द देवरिया न्यूज़/नई दिल्ली: संसद का शीतकालीन सत्र अगले महीने 1 दिसंबर से शुरू होने जा रहा है और इस बार सरकार का विधायी एजेंडा काफी व्यस्त रहने वाला है। केंद्र सरकार कुल 10 नए विधेयक पेश करने की तैयारी में है, जिनमें परमाणु ऊर्जा विधेयक, 2025, भारतीय उच्च शिक्षा आयोग विधेयक और राष्ट्रीय राजमार्ग (संशोधन) विधेयक जैसे कई अहम बिल शामिल हैं। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा परमाणु ऊर्जा विधेयक, 2025 को लेकर है, जिसे भारत की ऊर्जा नीति में एक ऐतिहासिक बदलाव माना जा रहा है।


1. परमाणु ऊर्जा विधेयक, 2025 – प्राइवेट कंपनियों के लिए खुलेगा न्यूक्लियर सेक्टर

यह विधेयक भारत में परमाणु ऊर्जा उत्पादन और उसके नियमन से जुड़े प्रावधानों को नए तरीके से परिभाषित करेगा।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसके पारित होते ही निजी कंपनियों—चाहे भारतीय हों या विदेशी—को न्यूक्लियर पावर प्लांट लगाने की अनुमति मिल जाएगी। फिलहाल यह काम केवल सरकारी कंपनी NPCIL ही करती है।

यह बदलाव ऊर्जा क्षेत्र में निजी निवेश और तकनीक को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है।


2. भारतीय उच्च शिक्षा आयोग विधेयक

यह बिल भारत में उच्च शिक्षा को नई दिशा देने के लिए तैयार किया गया है।
प्रस्तावित कानून के तहत एक एकीकृत उच्च शिक्षा आयोग की स्थापना होगी, जो विश्वविद्यालयों एवं उच्च शिक्षा संस्थानों को

  • अधिक स्वायत्तता,

  • बेहतर मान्यता प्रणाली,

  • और पारदर्शी मूल्यांकन तंत्र
    प्रदान करेगा।


3. राष्ट्रीय राजमार्ग (संशोधन) विधेयक

हाईवे निर्माण में अक्सर जमीन अधिग्रहण अटक जाता है।
यह बिल भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को

  • तेज,

  • सरल

  • और अधिक पारदर्शी
    बनाने के उद्देश्य से लाया जा रहा है।

इससे नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट्स में होने वाली देरी कम होने की उम्मीद है।


4. कॉरपोरेट कानून (संशोधन) विधेयक

यह बिल कंपनी अधिनियम, 2013 और एलएलपी अधिनियम, 2008 में सुधार करके ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।
इसके बाद कंपनियों के लिए कानूनी प्रक्रियाएँ और अनुपालन आसान होंगे।


5. प्रतिभूति बाजार संहिता विधेयक, 2025

वित्तीय बाजार से जुड़े तीन प्रमुख कानूनों—

  • SEBI अधिनियम (1992)

  • डिपॉजिटरी अधिनियम (1996)

  • प्रतिभूति अनुबंध अधिनियम (1956)

को मिलाकर एक एकीकृत प्रतिभूति बाजार संहिता बनाने का प्रस्ताव है।
इससे पूंजी बाजार की निगरानी और नियमों की स्पष्टता में सुधार होगा।


6. संविधान (131वां संशोधन) विधेयक

सरकार इस सत्र में संविधान के 131वें संशोधन का प्रस्ताव भी लाएगी, जिसके तहत चंडीगढ़ को संविधान के आर्टिकल 240 के दायरे में लाया जाएगा
आर्टिकल 240 केंद्र को केंद्र शासित प्रदेशों के लिए कानून बनाने की शक्ति देता है।


7. मध्यस्थता और सुलह अधिनियम संशोधन बिल

कोर्ट में लंबित विवादों को कम करने और आर्बिट्रेशन प्रक्रिया को तेज और सरल बनाने के लिए यह बिल लाया जा रहा है।
इससे व्यावसायिक मामलों में विशेष लाभ होगा।


सत्र का एजेंडा भारी – बजट भी शामिल

इन नए बिलों के अलावा पिछले सत्र के दो विधेयक, तथा इस वर्ष का पहला अनुपूरक बजट भी चर्चा और पारित होने के लिए सूचीबद्ध है।

सत्र 1 दिसंबर से 19 दिसंबर तक चलेगा और इसमें 15 कार्य दिवस होंगे।

शीतकालीन सत्र में सरकार अपने बड़े सुधारों को आगे बढ़ाने की कोशिश करेगी, जबकि विपक्ष कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है।


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