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सुप्रीम कोर्ट बनाएगा अंग प्रत्यारोपण की नई गाइडलाइन, गरीब मरीजों को भी मिलेगा समान मौका

Published on: November 20, 2025
Supreme Court will make organ transplant

द देवरिया न्यूज़/नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अंग प्रत्यारोपण (Organ Transplant) को लेकर देशभर में एक एकीकृत गाइडलाइन तैयार करने पर सहमति जताई है। इस पहल का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद लोगों को जीवनरक्षक सर्जरी का समान अवसर उपलब्ध कराना है। अदालत ने इस मामले में केंद्र सरकार और याचिकाकर्ता दोनों से सुझाव मांगे हैं, ताकि एक पारदर्शी और न्यायसंगत व्यवस्था बनाई जा सके।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील के. परमेश्वर ने सीजेआई बी. आर. गवई और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच के सामने दलील दी कि देश में अंगों की उपलब्धता का नेशनल डेटा ग्रिड होना चाहिए। इससे प्रतीक्षा सूची में शामिल मरीज यह समझ सकेंगे कि उन्हें अंग मिलने की कितनी संभावना है और वे कतार में किस स्थान पर खड़े हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हर राज्य में अलग-अलग प्रतीक्षा सूची तैयार की जानी चाहिए, जिससे प्रक्रिया पारदर्शी हो सके।

परमेश्वर ने तर्क दिया कि देश में 90% अंग प्रत्यारोपण निजी क्षेत्र के अस्पतालों में होता है, जहां उच्च लागत और संसाधनों की उपलब्धता गरीब और पिछड़े तबके के लोगों के लिए बड़ी बाधा बनती है। उन्होंने सुझाव दिया कि सुप्रीम कोर्ट केंद्र व राज्यों को निर्देश दे कि हर राज्य में कम से कम एक सरकारी अस्पताल में सस्ती दरों पर अंग प्रत्यारोपण की सुविधा उपलब्ध कराई जाए।

महिलाएं दान करती ज्यादा, पुरुष पाते ज्यादा: वकील का दावा

याचिकाकर्ता ने अंग दान में लिंग असंतुलन पर भी चिंता जताई। उन्होंने अदालत को बताया कि दान देने वालों में अधिकतर महिलाएं होती हैं, जबकि प्रत्यारोपण प्राप्त करने वाले पुरुषों की संख्या अधिक है, जो सामाजिक पक्षपात की ओर इशारा करता है।

सरकार भी सहमत, लेकिन अलग नियमों की मांग

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने याचिकाकर्ता के सुझावों को “व्यावहारिक और आवश्यक” बताते हुए समर्थन किया। हालांकि उन्होंने मांग की कि दो अलग श्रेणियों के लिए अलग नियम बनाए जाएं—

  1. सामान्य दानदाता

  2. दुर्घटना में मृत लोगों से लिए गए अंग

फर्जी दुर्घटनाओं का मामला भी उठा

सुनवाई के दौरान जस्टिस विनोद चंद्रन ने दक्षिण भारत में हुए कथित ‘मोटिवेटेड एक्सीडेंट’ मामलों का जिक्र किया, जहां जानबूझकर दुर्घटनाएं कराई गईं ताकि किसी मरीज के लिए आवश्यक अंग उपलब्ध कराए जा सकें। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर केरल में एक फिल्म भी बनी थी और एक पुलिस अधिकारी इसकी पटकथा से जुड़े थे।

मेहता ने ऐसे मामलों को हत्या जैसा गंभीर अपराध बताया और कहा कि इन पर कड़ी निगरानी जरूरी है।

अगले कदम

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने केंद्र सरकार और याचिकाकर्ता से कहा कि वे गाइडलाइन के लिए सुझाए जाने वाले बिंदुओं का प्रारूप तैयार कर बुधवार को अदालत में पेश करें। अदालत चाहती है कि एक ऐसी प्रणाली बने जो—

  • गरीब मरीजों के लिए सुलभ हो

  • अंग आवंटन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाए

  • सरकारी अस्पतालों में भी प्रत्यारोपण उपलब्ध कराए

  • शोषण और फर्जी दुर्घटनाओं जैसी घटनाओं पर रोक लगाए

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे को उच्च प्राथमिकता के साथ लिया जा रहा है और जल्द ही राष्ट्रव्यापी नीति लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाए जाएंगे।


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