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UAPA मामलों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, एक साल में ट्रायल पूरा करने का निर्देश

Published on: March 26, 2026
Supreme Court on UAPA cases
द  देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली : गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) से जुड़े लंबित मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा जांच किए जा रहे मामलों की सुनवाई एक वर्ष के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया है। साथ ही राज्यों से कहा गया है कि मामलों के तेजी से निपटारे के लिए अतिरिक्त विशेष अदालतों की स्थापना की जाए।

मंगलवार को चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश दिया कि इन विशेष अदालतों में समर्पित लोक अभियोजकों की नियुक्ति की जाए, ताकि रोजाना सुनवाई सुनिश्चित हो सके और ट्रायल में अनावश्यक देरी न हो।

राज्यों से चार सप्ताह में जवाब तलब

सुनवाई के दौरान 17 राज्यों के एडवोकेट जनरल ने विशेष NIA अदालतों के गठन के लिए केंद्रीय सहायता लेने की इच्छा जताई। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को चार सप्ताह के भीतर यह बताने का निर्देश दिया कि लंबित मामलों के निपटारे के लिए कितनी विशेष अदालतों की आवश्यकता है।

हाई कोर्ट को भी निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इन विशेष अदालतों के संचालन के लिए पर्याप्त स्टाफ की व्यवस्था करना हाई कोर्ट की जिम्मेदारी होगी। साथ ही, जहां लोक अभियोजकों की कमी है, वहां विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति की जाए।

केंद्र सरकार का पक्ष

केंद्र की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि गृह मंत्रालय ने राज्यों को सुझाव दिया है कि सुरक्षा कारणों से अलग न्यायालय परिसर बनाने की बजाय मौजूदा अदालतों को ही NIA मामलों के लिए नामित किया जा सकता है।

सबसे ज्यादा मामले दिल्ली में लंबित

देश में NIA से जुड़े सबसे अधिक लंबित मामले दिल्ली (59) में हैं। इसके बाद जम्मू-कश्मीर (38) और असम, केरल व गुजरात (33-33) का स्थान है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए इन मामलों की समयबद्ध सुनवाई बेहद जरूरी है और सभी पक्षों को इसके लिए ठोस कदम उठाने होंगे।


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