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सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का 16 भाषाओं में अनुवाद, आम लोगों तक न्याय की पहुंच आसान: CJI सूर्यकांत

Published on: December 22, 2025
Supreme Court decisions in 16 languages
द देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली/इटावा : भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कहा है कि भले ही सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक भाषा अंग्रेजी है, लेकिन अब उसके फैसलों का 16 भारतीय भाषाओं में अनुवाद किया जा रहा है। इससे आम नागरिकों के लिए न्याय को समझना और उस तक पहुंच बनाना कहीं अधिक आसान हो गया है। उन्होंने इसे न्याय प्रणाली को जन-जन से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
इटावा के इस्लामिया इंटर कॉलेज में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए CJI सूर्यकांत ने कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं होती, बल्कि वह हमारी सोच, संस्कार और मूल्यों को भी गढ़ती है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि न्याय तभी सार्थक है, जब वह आम आदमी की समझ की भाषा में उपलब्ध हो।
मुख्य न्यायाधीश ने इटावा जिले को हिंदी भाषा और संस्कृति का एक सशक्त केंद्र बताते हुए कहा कि पिछले तीन दशकों में यह क्षेत्र सांस्कृतिक दृष्टि से लगातार मजबूत हुआ है। उन्होंने कहा कि इस्लामिया इंटर कॉलेज जैसे शिक्षण संस्थानों से पढ़कर निकले छात्र आज देश और प्रदेश में उच्च पदों पर पहुंचकर समाज और राष्ट्र को दिशा दे रहे हैं, जो इटावा के गौरव का विषय है।
कार्यक्रम के दौरान CJI सूर्यकांत ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश स्वर्गीय प्रेम शंकर गुप्ता को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि जस्टिस गुप्ता ने न्यायिक प्रणाली में हिंदी के समुचित उपयोग के लिए उल्लेखनीय कार्य किया। अपने 15 वर्षों के कार्यकाल में उन्होंने हिंदी भाषा में 4,000 से अधिक फैसले लिखे, जो न्यायालयों में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने की दिशा में मील का पत्थर साबित हुए।
यह कार्यक्रम हिंदी सेवा निधि द्वारा आयोजित 33वें ‘सारस्वत समारोह’ के तहत हुआ, जिसका उद्देश्य हिंदी भाषा, साहित्य और संस्कृति के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार पर विचार-विमर्श करना है। CJI ने कहा कि इस तरह के सांस्कृतिक और भाषाई आंदोलनों को पूरे देश में और व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने की जरूरत है।
उन्होंने इटावा के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह नगर प्राचीन काल से ‘गंगदेव शहर’ के नाम से जाना जाता रहा है और आज एक सांस्कृतिक राजधानी के रूप में उभर रहा है। CJI ने कहा कि जिस भाषा और संस्कृति में हमारा जन्म होता है, वही हमारी असली विरासत होती है। उस विरासत को संरक्षित करना और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना हम सभी की नैतिक जिम्मेदारी है।
CJI सूर्यकांत का यह संदेश न केवल भाषा और संस्कृति के महत्व को रेखांकित करता है, बल्कि न्याय को आम नागरिकों के और करीब लाने की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।

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