जासूसी की आशंकाओं के बीच केंद्र सरकार ने उपग्रह आधारित टोल टैक्स वसूली की योजना भी अस्थायी रूप से रोक दी है। नेता विपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और अन्य विपक्षी नेता इस मुद्दे पर मंगलवार को बैठक कर सकते हैं। इस बैठक में सर्वसम्मति से सरकार को घेरने की रणनीति बनाई जाएगी और संसद में चर्चा कराने की मांग उठ सकती है। यदि सरकार चर्चा के लिए तैयार नहीं होती, तो संसद के बाहर और सड़कों पर इसका विरोध किया जा सकता है।
इससे पहले जुलाई 2021 में राहुल गांधी सहित कई विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया था कि इस्राइल से लाए गए स्पाइवेयर ‘पेगासस’ से उनकी जासूसी की गई। इस आरोप पर भारी हंगामा हुआ था, लेकिन जब केंद्र ने जांच के लिए राहुल गांधी से उनका फोन जमा करने को कहा, तो उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया।
सरकार के आदेश के पीछे वजह
मोबाइल फोन चोरी और लगातार बढ़ती स्पैम कॉलों को रोकने के लिए सरकार ने संचार साथी ऐप को अनिवार्य करने का फैसला लिया है। इस ऐप से चोरी हुए फोन को ब्लॉक करना आसान होता है, जिससे डेटा चोरी या दुरुपयोग का खतरा काफी कम हो जाता है। स्पैम कॉल्स की शिकायतों को देखते हुए भी यह ऐप एक प्रभावी समाधान माना जा रहा है।
संचार साथी ऐप इसी वर्ष 16 मई को लॉन्च किया गया था और अभी यह ऐच्छिक है। लेकिन केंद्र ने सभी मोबाइल कंपनियों को 90 दिनों के भीतर इसे सभी नए फोन में इंस्टॉल करने का आदेश दिया है। पहले से बिक चुके फोन में भी इसे अनिवार्य रूप से इंस्टॉल कराने का निर्देश दिया गया है। अब तक करीब 50 लाख लोग इसे स्वेच्छा से डाउनलोड कर चुके हैं, जबकि एप्पल जैसी कंपनियां इसे अनिवार्य बनाने पर आपत्ति जता रही हैं।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, ऐप की मदद से अब तक 22.76 लाख फोन वापस प्राप्त किए जा चुके हैं और 37.28 लाख स्मार्टफोन चोरी या गायब होने पर ब्लॉक किए गए हैं। साथ ही, उपयोगकर्ता अनचाही कॉलों की शिकायत कर उन्हें ब्लॉक करने की सुविधा से भी राहत पा रहे हैं।