द देवरिया न्यूज़ : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को स्वाहिद दिवस के अवसर पर असम आंदोलन में जान न्योछावर करने वाले सभी शहीदों को श्रद्धांजलि दी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उन्होंने लिखा कि असम आंदोलन भारत के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखता है और सरकार उन सभी के सपनों को पूरा करने के लिए संकल्पित है, जिन्होंने असम की सांस्कृतिक विरासत और विकास के लिए संघर्ष किया था।
प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वाहिद दिवस पर हम असम आंदोलन के वीरों के साहस और बलिदान को याद करते हैं। उन्होंने असम की संस्कृति को मजबूत बनाने और राज्य के सर्वांगीण विकास के प्रति केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
सर्बानंद सोनोवाल ने कहा—असम आंदोलन ने दी एकता और पहचान की शक्ति
केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने भी स्वाहिद दिवस पर असम आंदोलन के शहीदों को नमन किया। उन्होंने इस आंदोलन को एक “भव्य संघर्ष” बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य असम की भाषा, संस्कृति, जनसांख्यिकी और अस्तित्व की रक्षा करना था।
सोनोवाल ने कहा कि ऐतिहासिक असम आंदोलन ने असमी समाज को राष्ट्रीय हित में एकजुट होने की प्रेरणा दी। इस आंदोलन के दौरान 860 से अधिक लोगों ने प्राणों की आहुति दी, जबकि अनगिनत लोग उत्पीड़न और गंभीर चोटों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि शहीदों का बलिदान हमेशा असमी समाज को प्रेरित करता रहेगा।
क्या है स्वाहिद दिवस?
स्वाहिद दिवस हर वर्ष 10 दिसंबर को मनाया जाता है। यह दिन उन शहीदों की स्मृति को समर्पित है जिन्होंने 1979 में शुरू हुए असम आंदोलन में अपनी जान दी। यह आंदोलन असम स्टूडेंट्स यूनियन (एएसयू) और ऑल असम गण संघर्ष परिषद (एएएसजीपी) के नेतृत्व में बांग्लादेशी घुसपैठ के खिलाफ शुरू हुआ था।
कैसे खत्म हुआ असम आंदोलन?
असम आंदोलन 1985 में तब समाप्त हुआ, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने ऐतिहासिक असम समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते में अवैध प्रवासियों की पहचान, असम की सांस्कृतिक व भाषाई पहचान की रक्षा और इसके लिए संवैधानिक व प्रशासनिक गारंटी सुनिश्चित करने का वादा किया गया।
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