द देवरिया न्यूज़,इस्लामाबाद : गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि देश की अर्थव्यवस्था किस हद तक बाहरी कर्ज पर निर्भर हो चुकी है। हाल ही में भारतीय मूल के वर्ल्ड बैंक अध्यक्ष अजय बंगा चार दिवसीय दौरे पर पाकिस्तान पहुंचे, जहां उनके स्वागत को एक औपचारिक कूटनीतिक यात्रा से आगे बढ़ाकर सांस्कृतिक और भावनात्मक कार्यक्रम का रूप दे दिया गया।
बंगा की यात्रा के दौरान उन्हें पंजाब प्रांत के खुशाब जिले में स्थित उनके पैतृक आवास भी ले जाया गया। इसे पाकिस्तान सरकार ने सौहार्द और विरासत से जोड़कर पेश किया, लेकिन आलोचकों का कहना है कि यह पूरा आयोजन देश के प्रमुख कर्जदाता को खुश करने की कोशिश का हिस्सा था।
प्रधानमंत्री पहले कर्ज को बताया शर्मिंदगी, फिर किया भव्य स्वागत
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ हाल ही में सार्वजनिक मंच से यह स्वीकार कर चुके हैं कि वे और आर्मी चीफ असीम मुनीर अलग-अलग देशों में जाकर कर्ज मांग रहे थे। शहबाज शरीफ ने कहा था कि कर्ज मांगते समय उनका “सिर शर्म से झुक जाता है।”
हालांकि, इसी पृष्ठभूमि में वर्ल्ड बैंक जैसे प्रमुख कर्जदाता के प्रमुख के लिए किया गया भव्य और प्रतीकात्मक स्वागत कई सवाल खड़े कर रहा है। आलोचकों के मुताबिक, यह विरोधाभास पाकिस्तान की आर्थिक मजबूरी को उजागर करता है।
वर्ल्ड बैंक और पाकिस्तान का कर्ज संबंध
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था इस समय गंभीर दबाव में है।
देश पर कुल बाहरी कर्ज लगभग 130 अरब डॉलर है
इसमें से करीब 20 फीसदी हिस्सा वर्ल्ड बैंक का है
साल 2025 के अंत में वर्ल्ड बैंक ने पाकिस्तान को सार्वजनिक सेवाओं के लिए 70 करोड़ डॉलर की किश्त जारी की थी। इसके अलावा पाकिस्तान IMF से भी अरबों डॉलर के नए पैकेज की उम्मीद लगाए बैठा है। ऐसे में कर्जदाताओं के साथ संबंध बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता बन गया है।
पैतृक घर पर विशेष इंतजाम
अजय बंगा जब खुशाब जिले में अपने पैतृक घर पहुंचे, तो स्थानीय प्रशासन की ओर से विशेष तैयारियां की गई थीं।
घर और आसपास की दीवारों को पेंट कराया गया
पंजाबी और हिंदी में स्वागत संदेश लिखे गए
बंगा को उनके परिवार से जुड़े मूल राजस्व रिकॉर्ड भी दिखाए गए
स्थानीय अधिकारियों ने उन्हें “मिट्टी का बेटा” कहकर संबोधित किया। उल्लेखनीय है कि बंगा के पूर्वज 1947 के बंटवारे से पहले इसी इलाके में रहते थे।
20 अरब डॉलर के कर्ज फ्रेमवर्क पर बातचीत
बंगा की यात्रा केवल सांस्कृतिक नहीं थी। उन्होंने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगजेब और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आधिकारिक बैठकें भी कीं। इन बैठकों में 20 अरब डॉलर के कंट्री पार्टनरशिप फ्रेमवर्क पर चर्चा हुई, जिसके तहत पाकिस्तान अगले एक दशक में वर्ल्ड बैंक से भारी वित्तीय सहायता हासिल कर सकता है। हालांकि, इसके लिए पाकिस्तान को गवर्नेंस और आर्थिक सुधारों से जुड़ी सख्त शर्तें पूरी करनी होंगी।
विरासत से ज्यादा मजबूरी का प्रदर्शन?
पाकिस्तानी अधिकारियों ने अजय बंगा की पैतृक यात्रा को शांति, सद्भाव और मेहमाननवाजी का प्रतीक बताया। लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि यह आयोजन विरासत के सम्मान से ज्यादा आर्थिक मजबूरी को दर्शाता है। आलोचकों के अनुसार, जिस देश के सामने विकल्प खत्म हो रहे हों, वहां कर्जदाताओं को खुश करना प्राथमिकता बन जाता है—और पाकिस्तान की यह यात्रा उसी हकीकत की तस्वीर पेश करती है।
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