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भारत की निर्यात इंडस्ट्री पर दोहरी मार: BCG रिपोर्ट ने जलवायु परिवर्तन से भारी खतरे की चेतावनी दी

Published on: December 1, 2025
On India's export industry

द देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली: जहां ट्रंप सरकार की ओर से लगाए गए टैरिफ ने भारत के निर्यात पर पहले ही दबाव बढ़ा दिया है, वहीं अब एक और गंभीर चुनौती सामने आ गई है। वैश्विक कंसल्टिंग फर्म BCG की नई रिपोर्ट के अनुसार, भारत के निर्यात से जुड़े कई उद्योग—जो अंतरराष्ट्रीय नियमों के दायरे में आते हैं—जलवायु परिवर्तन के चलते बड़े खतरे का सामना कर रहे हैं। एल्युमीनियम, स्टील और लोहे से जुड़ी इंडस्ट्री इस जोखिम की सीधी चपेट में हैं।

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि इन खतरों को समय रहते नहीं समझा गया, तो इन सेक्टरों की कमाई, संचालन और दीर्घकालिक टिकाऊपन पर गंभीर असर पड़ सकता है।

भारत को भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है

बीसीजी के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीनियर पार्टनर (एशिया पैसिफिक- क्लाइमेट एंड सस्टेनेबिलिटी) सुमित गुप्ता ने बताया कि ‘क्लाइमेट रिस्क इंडेक्स 2026’ के अनुसार भारत दुनिया के उन 10 देशों में शामिल है जो चरम मौसम घटनाओं से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। COP30 में जारी इस रिपोर्ट में कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन को नजरअंदाज करना भारत के लिए बहुत महंगा साबित हो सकता है।

RBI और WEF 2024 के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि 2030 तक भारत की जीडीपी का लगभग 4.5% हिस्सा जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चरम घटनाओं के कारण गंभीर जोखिम में है। वहीं सदी के अंत तक राष्ट्रीय आय का 6.4% से 10% तक नुकसान होने की आशंका है।

इंफ्रास्ट्रक्चर और कंपनियों पर सीधा प्रभाव

रिपोर्ट के अनुसार, चरम मौसम से सड़कें और पुल जैसे भौतिक इंफ्रास्ट्रक्चर क्षतिग्रस्त होते हैं, जिससे उत्पादन और सप्लाई चेन प्रभावित होती है। मजदूरों के काम के घंटे घटते हैं और कई प्रोजेक्ट्स अनिश्चित देरी का शिकार हो सकते हैं। जोखिम वाले क्षेत्रों में निवेश की क्षमता भी कमजोर पड़ सकती है।

कंपनियों की कमाई पर बड़ा खतरा

बीसीजी का अनुमान है कि वर्ष 2050 तक जलवायु खतरों के सीधे प्रभाव के कारण वैश्विक कंपनियों के EBITDA (ब्याज, टैक्स और अन्य कटौतियों से पहले की कमाई) का 5% से 25% हिस्सा प्रभावित हो सकता है।

हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत की कंपनियां अब जलवायु जोखिम को गंभीरता से लेने लगी हैं, लेकिन यह चुनौती मुनाफे के साथ-साथ बिजनेस की लंबी अवधि की स्थिरता को भी प्रभावित कर सकती है।


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