द देवरिया न्यूज़,रियाद/नई दिल्ली : भारत और सऊदी अरब के द्विपक्षीय संबंधों में एक और अहम उपलब्धि जुड़ गई है। दोनों देशों ने एक महत्वपूर्ण वीजा छूट समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत कुछ विशेष श्रेणी के पासपोर्ट धारकों को शॉर्ट-स्टे वीजा लेने की आवश्यकता नहीं होगी। इस समझौते को भारत–सऊदी वीजा छूट समझौता नाम दिया गया है, जिसका उद्देश्य आधिकारिक और राजनयिक स्तर पर आपसी संपर्क को और अधिक सरल एवं प्रभावी बनाना है।
यह समझौता सऊदी अरब की राजधानी रियाद में विदेश मंत्रालय के मुख्यालय में संपन्न हुआ। समझौते पर सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय में प्रोटोकॉल मामलों के उप मंत्री अब्दुलमजीद अल-स्मरी और भारत के सऊदी अरब में राजदूत डॉ. सुहेल एजाज खान ने हस्ताक्षर किए। दोनों पक्षों ने इसे आपसी सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
किन्हें मिलेगी वीजा छूट
इस वीजा छूट का लाभ आम नागरिकों, पर्यटकों या व्यावसायिक यात्रियों को नहीं मिलेगा। यह सुविधा केवल राजनयिक पासपोर्ट, विशेष पासपोर्ट और आधिकारिक पासपोर्ट धारकों के लिए लागू होगी। इनमें वे वरिष्ठ सरकारी अधिकारी और सिविल सेवक शामिल हैं, जो आधिकारिक कार्यों या कूटनीतिक दायित्वों के तहत विदेश यात्रा करते हैं।
समझौते के लागू होने के बाद इन श्रेणियों के पासपोर्ट धारक भारत और सऊदी अरब के बीच अल्पकालिक यात्रा वीजा के बिना कर सकेंगे। इससे सरकारी बैठकों, उच्चस्तरीय वार्ताओं और राजनयिक गतिविधियों के लिए यात्राएं अधिक तेज, सुगम और समयबद्ध हो सकेंगी।
द्विपक्षीय संबंधों को मिलेगा बल
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के समझौते देशों के बीच नीतिगत संवाद और आपसी विश्वास को मजबूत करते हैं। इससे न केवल प्रशासनिक प्रक्रियाएं आसान होती हैं, बल्कि भविष्य में सहयोग के नए रास्ते भी खुलते हैं। भारत और सऊदी अरब के बीच यह समझौता ऐसे समय हुआ है, जब दोनों देश रणनीतिक साझेदारी को लगातार विस्तार दे रहे हैं।
हाल के वर्षों में भारत और सऊदी अरब के रिश्तों में व्यापार, ऊर्जा, रक्षा, पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। सऊदी–भारतीय रणनीतिक साझेदारी परिषद के तहत कई संयुक्त पहलें शुरू की गई हैं, जिनमें रक्षा सहयोग, निवेश, विज्ञान एवं तकनीक और वैश्विक मंचों पर समन्वय शामिल है।
भविष्य की संभावनाएं
विश्लेषकों के अनुसार, यह वीजा छूट समझौता आने वाले समय में यात्रा और सहयोग के दायरे को और बढ़ाने की आधारशिला साबित हो सकता है। इससे दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संपर्क बढ़ेगा और द्विपक्षीय संबंधों को नई गति मिलेगी।
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