द देवरिया न्यूज़/नई दिल्ली: भारत और इजरायल के रिश्ते आर्थिक और रणनीतिक स्तर पर नए मुकाम की ओर बढ़ रहे हैं। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को जानकारी दी कि दोनों देशों के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) से जुड़ी संदर्भ शर्तों पर हस्ताक्षर हो चुके हैं। उनका कहना है कि यह समझौता भविष्य में व्यापक आर्थिक सहयोग और व्यापारिक संबंधों की मजबूती का आधार बनेगा।
पीयूष गोयल ने कहा कि भारत और इजरायल आने वाले समय में अर्थव्यवस्था, सुरक्षा, नवाचार, ग्लोबल शांति और तकनीक जैसे कई क्षेत्रों में साझेदारी को मजबूत करेंगे। उनके अनुसार इजरायल की टेक्नोलॉजी क्षमता और भारत के विशाल मार्केट व मानव संसाधन का मेल वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण परिणाम दे सकता है।
तकनीक और इनोवेशन में नई संभावनाएं
गोयल ने बताया कि इजरायल में स्टार्टअप, इनोवेशन और बिजनेस सेक्टर भारत के साथ मिलकर काम करने के लिए उत्साहित है। उन्होंने कहा कि साइबर सिक्योरिटी, मोबिलिटी, जलवायु परिवर्तन, कम-कार्बन स्टील उत्पादन, मेड-टेक डिवाइसेज जैसे क्षेत्रों में दोनों देश संयुक्त रूप से शोध और तकनीकी विकास कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि यह सहयोग सिर्फ तकनीक तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि पारस्परिक स्टार्टअप एक्सचेंज के रूप में “इनोवेशन ब्रिज” स्थापित कर सकता है, जिससे दोनों देश अपनी-अपनी जरूरतों के अनुसार नवाचार को स्केल और उद्देश्य प्रदान कर सकेंगे।
इजरायल मॉडल से सीख: सुरक्षा से नवाचार तक
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इजरायल ने दिखाया है कि कैसे एक छोटा देश नवाचार, रिसर्च और तकनीकी विकास की मदद से विश्व स्तर पर बड़ी भूमिका निभा सकता है।
उन्होंने बताया कि इजरायल ने अपनी सुरक्षा जरूरतों, कृषि विकास, स्वास्थ्य तकनीक और जलवायु समाधान को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ा है। इससे ऐसी खोज विकसित हुईं जिनका उपयोग रक्षा क्षेत्र के अलावा आम जनता के दैनिक जीवन में भी किया जा सकता है।
गोयल के अनुसार, यह “ड्यूल यूज़ इनोवेशन मॉडल” भारत के लिए भी प्रेरणा बन सकता है, जहां तकनीक एक साथ नागरिक जीवन और रक्षा क्षमता दोनों को मजबूत कर सकती है।
भारत बनेगा स्टार्टअप की वैश्विक राजधानी
गोयल ने कहा कि इजरायल में हर 1,000 नागरिकों पर एक स्टार्टअप मौजूद है, जिसे वह विश्व का प्रमुख “इनोवेशन हब” बनाता है। भारत भी आने वाले वर्षों में दुनिया की स्टार्टअप राजधानी बनने की दिशा में काम कर रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत का विशाल युवा प्रतिभा आधार, तकनीकी कौशल, डिजिटल इकोसिस्टम और वैश्विक निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी इसे वैश्विक स्टार्टअप शक्ति के रूप में स्थापित कर सकती है।
सरकार का लक्ष्य है कि भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम डीप-टेक, रक्षा तकनीक, स्वास्थ्य और जलवायु समाधान पर आधारित उच्च गुणवत्ता वाले नवाचार के नए स्तर तक पहुंचे।
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