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मोदी सरकार शीतकालीन सत्र में पेश करेगी एटॉमिक एनर्जी बिल; निजी कंपनियों के लिए खुलेगा परमाणु ऊर्जा क्षेत्र

Published on: December 2, 2025
modi government winter session

द देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली: संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान केंद्र सरकार एटॉमिक एनर्जी बिल पेश करने की तैयारी में है। यह बिल खास चर्चा में है क्योंकि इसके जरिए पहली बार निजी कंपनियों को असैन्य (सिविल) परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में प्रवेश का रास्ता मिल सकता है। सरकार का मानना है कि इससे भारत की विदेशी ऊर्जा पर निर्भरता घटेगी और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में बताया कि सरकार न्यूक्लियर सेक्टर को प्राइवेट कंपनियों के लिए खोलने पर काम कर रही है। उनके अनुसार, निजी भागीदारी छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर, एडवांस्ड रिएक्टर और नई तकनीक में बड़ा अवसर पैदा करेगी। यह कदम भारत के 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा उत्पादन के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।


क्या है एटॉमिक एनर्जी बिल 2025?

शीतकालीन सत्र में केंद्र सरकार कुल 10 विधेयक पेश करने वाली है, जिनमें एटॉमिक एनर्जी बिल 2025 प्रमुख है। इसका उद्देश्य देश में परमाणु ऊर्जा के उपयोग, प्रबंधन और नियमन को आधुनिक बनाना है।

इस बिल के जरिए सरकार सिविल न्यूक्लियर सेक्टर में निजी भागीदारी को बढ़ावा देना चाहती है, ताकि आने वाले वर्षों में भारत अधिक क्षमता के साथ न्यूक्लियर पावर जेनरेशन कर सके।

इसके साथ ही सिविल लायबिलिटी फॉर न्यूक्लियर डैमेज एक्ट (CLNDA), 2010 में भी संशोधन की योजना है। यह संशोधन परमाणु क्षेत्र में निवेश और प्राइवेट भागीदारी के लिए जरूरी माना जा रहा है।


कौन-से बदलाव प्रस्तावित हैं?

सरकार परमाणु ऊर्जा से जुड़े मौजूदा कानूनों में कई बड़े सुधार करने जा रही है:

  • CLNDA, 2010 का सेक्शन 3 फिलहाल केंद्र सरकार और उसकी कंपनियों को ही परमाणु सामग्री बनाने, खरीदने और बेचने की अनुमति देता है।

  • इसी कारण निजी क्षेत्र अभी न्यूक्लियर पावर प्लांट बनाने या प्रौद्योगिकी विकसित करने की स्थिति में नहीं है।

  • नए बिल के तहत इस प्रतिबंध को आंशिक रूप से हटाया जा सकता है, जिससे निजी कंपनियां कई स्तरों पर भागीदारी कर सकेंगी।


एटॉमिक एनर्जी बिल से होने वाले संभावित फायदे

  • न्यूक्लियर सेक्टर में प्राइवेट कंपनियों की एंट्री, जिससे उत्पादन क्षमता बढ़ेगी।

  • ऊर्जा सुरक्षा में मजबूती, क्योंकि परमाणु ऊर्जा की उपलब्धता बढ़ने पर भारत आयात पर कम निर्भर होगा।

  • नई तकनीक—SMR, एडवांस्ड रिएक्टर, इनोवेशन—को बढ़ावा मिलेगा।

  • तेल और गैस आयात में कमी, जिससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी।

  • एविएशन, रक्षा और विज्ञान अनुसंधान में देश को रणनीतिक बढ़त मिलेगी।

  • वैश्विक स्तर पर भारतीय परमाणु क्षमता और नेतृत्व और मजबूत होगा।


अभी भारत में कौन बना रहा परमाणु ऊर्जा?

वर्तमान में भारत में केवल सरकारी संस्थाएं ही परमाणु ऊर्जा उत्पादन करती हैं। मुख्य रूप से:

  • NPCIL (Nuclear Power Corporation of India Limited) – परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) के अधीन सरकारी कंपनी

  • NPCIL ही देश के सभी न्यूक्लियर पावर प्लांट का संचालन करती है।

नए बिल के लागू होने के बाद, पहली बार देश-विदेश की निजी कंपनियों को भी परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में भाग लेने का अवसर मिल सकता है।


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