मंगलवार को तृणमूल कांग्रेस के राज्य महासचिव और पार्टी प्रवक्ता कुणाल घोष ने अरूप विश्वास के इस्तीफे से जुड़ा पत्र सोशल मीडिया पर साझा किया। पत्र पर 15 दिसंबर 2025 की तारीख दर्ज है, हालांकि सार्वजनिक किए गए पत्र में हस्ताक्षर न होने को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। इस्तीफे की पेशकश के बाद खेल व युवा कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को नवान्न तलब किया गया, जहां वे दोपहर में पहुंचे।
शनिवार को युवभारती स्टेडियम में हुई अव्यवस्था सामने आने के बाद से ही फुटबॉल प्रेमियों के एक बड़े वर्ग की नाराजगी अरूप विश्वास पर थी। माना जा रहा था कि अन्य राजनीतिक घटनाक्रमों के चलते यह मामला दब जाएगा, लेकिन इसके उलट अरूप विश्वास ने पहले ही मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर पद छोड़ने की इच्छा जता दी।
इस बीच, पुलिस प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई की खबर आने के कुछ ही मिनटों बाद कुणाल घोष ने दावा किया कि मुख्यमंत्री ने इस्तीफे को मंजूरी दे दी है, हालांकि बाद में उन्होंने अपना पोस्ट संशोधित कर लिया। कुणाल घोष ने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राजधर्म का पालन करते हुए निष्पक्ष जांच के आदेश दिए हैं और सरकार पूरी गंभीरता से इस मामले की जांच कर रही है।
प्रशासनिक कार्रवाई भी तेज
मेसी के कार्यक्रम में सुरक्षा और व्यवस्था में चूक के मामले में विधाननगर के डीसीपी अनीश सरकार को ड्यूटी में लापरवाही के आरोप में निलंबित कर दिया गया है और उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इसके अलावा राज्य के खेल सचिव राजेश कुमार सिन्हा को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, जबकि सॉल्ट लेक स्टेडियम के सीईओ डीके नंदन की सेवाएं वापस ले ली गई हैं।
मुख्य सचिव ने बताया कि इस पूरे मामले की गहन जांच के लिए चार वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की एक विशेष जांच टीम (एसआईटी) गठित की गई है, जो मेसी के कार्यक्रम के दौरान हुई अव्यवस्था और लापरवाही के सभी पहलुओं की जांच करेगी।
क्या था पूरा मामला
13 दिसंबर को लियोनल मेसी पहली बार कोलकाता के सॉल्ट लेक स्टेडियम में पहुंचे थे। उन्हें देखने के लिए हजारों प्रशंसक स्टेडियम पहुंचे और भारी कीमतों पर टिकट खरीदे गए। लेकिन मेसी मैदान पर कुछ ही मिनट रुक सके। जैसे ही वह मैदान में आए, 100 से अधिक लोग—जिनमें राजनीतिक नेता, गणमान्य व्यक्ति और सुरक्षा कर्मी भी शामिल थे—उनकी ओर दौड़ पड़े। सुरक्षा घेरा टूट गया और हालात बेकाबू हो गए।
स्थिति बिगड़ती देख आयोजकों ने सुरक्षा कारणों से मेसी को मैदान से बाहर ले जाने का फैसला किया। इससे स्टेडियम में मौजूद प्रशंसकों में नाराजगी फैल गई और पूरे आयोजन की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े हो गए। इसी अव्यवस्था को लेकर अब राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर बड़ी कार्रवाई देखने को मिल रही है।