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दुबई एयर शो हादसे में शहीद हुए विंग कमांडर नमांश स्याल का पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार, गांव में उमड़ा सैलाब

Published on: November 24, 2025
Martyred in Dubai Air Show accident

द देवरिया न्यूज़/शिमला। दुबई एयर शो में भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान तेजस के क्रैश होने की घटना में शहीद हुए विंग कमांडर नमांश स्याल (34) का पार्थिव शरीर रविवार को उनके पैतृक गांव पटियालकर (नगरोटा बगवां, कांगड़ा जिला) पहुंचा। हजारों लोगों की मौजूदगी में उनका अंतिम संस्कार पूर्ण सैन्य सम्मान के साथ किया गया। पूरे गांव में मातम का माहौल था और लोगों की आंखें नम थीं।

नमांश स्याल हैदराबाद एयरबेस में तैनात थे और देश के बेहतरीन पायलटों में गिने जाते थे। वे हिमाचल प्रदेश के उन गौरवशाली सपूतों में शामिल थे जिन्होंने भारत की वायु शक्ति को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


“देश ने बेहतरीन पायलट खोया, मैंने बेटा खो दिया” — पिता

अंतिम संस्कार के दौरान उनके पिता जगन्नाथ स्याल ने भावुक होते हुए कहा:

“देश ने एक बेहतरीन पायलट खो दिया है और मैंने अपना जवान बेटा। उसकी जिंदगी में कभी कोई पल बोरिंग नहीं रहा। वह जिस भी प्रतियोगिता में गया, जीता।”

उन्होंने यह भी बताया कि दुर्घटना की जांच भारत और दुबई की अलग-अलग एजेंसियां कर रही हैं:

“सरकार जांच कर रही है, हम न्याय की उम्मीद करते हैं।”

https://twitter.com/ANI/status/1992563934835180027


चाचा बोले — “देश के लिए बहुत बड़ा नुकसान”

शहीद पायलट के चाचा मदन लाल ने उन्हें याद करते हुए कहा:

“वह बचपन से ही तेज दिमाग वाला, होनहार और अनुशासित था। पूरे गांव के लिए गौरव था। आज गांव शोक में है, यह पूरे देश के लिए भारी क्षति है।”


दोस्तों और गांव वालों को छलक पड़े आंसू

नमांश स्याल के स्कूल साथी पंकज चड्ढा ने भावुक होकर कहा:

“हम सैनिक स्कूल सुजानपुर टिहरा में साथ पढ़े। वह हमारे स्कूल का गौरव था। एक रत्न खो दिया।”

स्थानीय निवासी संदीप कुमार ने कहा:

“वह हमारे छोटे भाई जैसा था। कुछ महीने पहले ही गांव आए थे। अभी भी विश्वास नहीं होता कि वह नहीं रहे।”

गांव में मौजूद हजारों लोग अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़े और ‘भारत मां का लाल अमर रहे’ के नारों से वातावरण गूंज उठा।


देश के लिए समर्पित था जीवन

रिपोर्ट्स के अनुसार, नमांश स्याल हमेशा से भारतीय वायुसेना में शामिल होना चाहते थे। स्कूल के दिनों से ही वह अनुशासन, पढ़ाई और खेलों में अव्वल रहे। वायुसेना में शामिल होने के बाद उन्होंने कई मिशनों और तकनीकी परीक्षण उड़ानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


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