द देवरिया न्यूज़,नई दिल्लीः चुनाव सुधारों पर लोकसभा में बुधवार को जोरदार बहस हुई। गृह मंत्री अमित शाह ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि ईवीएम पर सवाल उठाने के बाद अब कांग्रेस ने ‘वोट चोरी’ का नया आरोप गढ़ लिया है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर बिहार में यात्रा निकाली, लेकिन चुनाव हारने की वजह न ईवीएम है, न मतदाता सूची—बल्कि कांग्रेस का नेतृत्व है। उन्होंने यह भी कहा कि ईवीएम हेकाथॉन में भी कांग्रेस का कोई प्रतिनिधि सामने नहीं आया।
राहुल गांधी का पलटवार
राहुल गांधी ने जवाब देते हुए कहा कि अमित शाह बहस के दौरान बचाव की मुद्रा में रहे और विपक्ष के सवालों का जवाब नहीं दे पाए। राहुल ने कहा कि उन्होंने पारदर्शी मतदाता सूची और EVM स्ट्रक्चर की जानकारी मांगी थी, लेकिन सरकार जवाब देने से बचती रही। राहुल ने दावा किया कि “हरियाणा और बिहार में बीजेपी नेताओं द्वारा वोटिंग” को लेकर उन्होंने सबूत भी दिए थे, लेकिन इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई।
अमित शाह बोले—कांग्रेस के जमाने में मतपेटियां हाइजैक होती थीं
गृह मंत्री ने कहा कि कांग्रेस के दौर में बैलेट बॉक्स तक लूट लिए जाते थे, जबकि ईवीएम ने चुनावी चोरी को लगभग खत्म कर दिया है। शाह ने कहा कि बीजेपी कई चुनाव हारी है, लेकिन कभी आयोग की निष्पक्षता पर सवाल नहीं उठाया।
उन्होंने बताया कि देश में अलग-अलग दौर में कई बार SIR (Special Summary Revision) हुईं—ज्यादातर तब, जब कांग्रेस सत्ता में थी। शाह के अनुसार, “विपक्ष सवाल करता है कि चुनाव आयोग SIR क्यों कर रहा है, जबकि यह उसका संवैधानिक दायित्व है।”
EVM का संक्षिप्त इतिहास
भारत में EVM की यात्रा 1977 में शुरू हुई और पहली बार 1982 में केरल के पारूर उपचुनाव में परीक्षण किया गया। कानूनी बाधा के बाद 1989 में कानून में संशोधन हुआ और मशीनों को मान्यता मिली। 2004 का लोकसभा चुनाव दुनिया का पहला चुनाव था, जिसमें 100% मतदान EVM से कराया गया। पारदर्शिता बढ़ाने के लिए 2013 में VVPAT तकनीक जोड़ी गई और 2019 से इसे पूरे देश में लागू कर दिया गया। आज भारत में EVM पूरी तरह स्टैंडअलोन मशीनें हैं—इंटरनेट या वायरलेस से कनेक्ट नहीं होतीं। इन्हें सिर्फ दो सरकारी कंपनियाँ ECIL और BEL बनाती हैं।
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