द देवरिया न्यूज़/नई दिल्ली: बिहार के विधानसभा चुनाव नतीजों ने विपक्षी दलों, खासकर महागठबंधन के भीतर, कई सवाल खड़े कर दिए हैं। करारी हार के बाद समीक्षा की जरूरत तो साफ है, लेकिन इसके संकेत अभी से ही मिलने लगे हैं—सबसे पहले कांग्रेस के भीतर से ही।
कांग्रेस के बेहद निराशाजनक प्रदर्शन के बाद पार्टी नेताओं ने खुलकर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। एक तरफ शशि थरूर ने अपनी ही पार्टी को नसीहत दी और ‘बिहार प्रचार से दूरी’ का खुलासा किया, तो दूसरी तरफ डी.के. शिवकुमार ने कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के लिए नई रणनीति बनाने की बात कही। इधर झामुमो ने भी सीट-बंटवारे में भेदभाव का आरोप लगाते हुए कांग्रेस और RJD को ‘आईना’ दिखा दिया है।
शशि थरूर बोले—मुझे तो प्रचार के लिए बुलाया ही नहीं गया
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने बिहार नतीजों के बाद शुक्रवार को कहा कि उन्हें बिहार में प्रचार करने के लिए आमंत्रित ही नहीं किया गया।
थरूर ने कहा—
“पार्टी की जिम्मेदारी है कि हार के कारणों का विस्तार से अध्ययन करे।”
“हम गठबंधन में वरिष्ठ सहयोगी नहीं थे, RJD को भी अपने प्रदर्शन पर ध्यान देना होगा।”
“चुनाव जनता के मूड, संगठन, संदेश और रणनीति सब पर निर्भर करते हैं। इन सभी पर समीक्षा जरूरी है।”
उन्होंने कहा कि चूंकि वे प्रचार में शामिल नहीं थे, इसलिए जमीनी अनुभव पर टिप्पणी नहीं कर सकते, लेकिन
“जिन्होंने मैदान में काम किया है, वे गंभीर विश्लेषण जरूर करेंगे।”
कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के लिए नई रणनीति जरूरी — D.K. शिवकुमार
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता डी. के. शिवकुमार ने माना कि बिहार का नतीजा पार्टी के लिए बड़ा सबक है।
उन्होंने कहा—
“जनमानस ने जो जनादेश दिया है, वह हमारे लिए सीख है।”
“अब समय है कि कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के लिए नयी रणनीति तैयार की जाए।”
जब उनसे पूछा गया कि महिलाओं को 10,000 रुपये देने की योजना और महिला वोटर्स की बढ़ती संख्या क्या एनडीए की जीत का बड़ा कारण है, तो उन्होंने कहा कि
“विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद ही इस पर बोलूंगा।”
महागठबंधन ने ‘धर्म’ नहीं निभाया—JMM की महुआ माजी का आरोप
झारखंड मुक्ति मोर्चा की सांसद महुआ माजी ने बिहार में सीट-बंटवारे पर महागठबंधन को कटघरे में खड़ा कर दिया।
उनके आरोप—
“सीट बंटवारे के अंतिम समय में झामुमो के साथ भेदभाव किया गया।”
“हमें जिन सीटों पर लड़ना था, वे नहीं दी गईं।”
“महागठबंधन धर्म निभाने में कमी रही, जिसका असर नतीजों में साफ दिखता है।”
झामुमो ने छह सीटों पर स्वतंत्र रूप से लड़ने की घोषणा की थी, हालांकि बाद में किसी भी उम्मीदवार ने नामांकन दाखिल नहीं किया।
निष्कर्ष
बिहार नतीजों ने विपक्षी खेमे में—
आत्ममंथन की जरूरत
नए नेतृत्व और रणनीति की मांग
सहयोगियों के बीच अविश्वास
जैसे बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
कांग्रेस के भीतर उठती आवाजें, इंडिया गठबंधन की कमजोर रणनीति और सहयोगियों की नाराज़गी आने वाले महीनों में विपक्ष के लिए नई चुनौतियाँ खड़ी कर सकती हैं।
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