द देवरिया न्यूज़ ,नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने देशभर के करीब एक करोड़ से अधिक कर्मचारियों और पेंशनरों को दशहरा-दीवाली से पहले बड़ी राहत दी है। बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) में 3 फीसदी की वृद्धि को मंजूरी दे दी गई। अब 1 जुलाई 2025 से देय डीए की दर 55 प्रतिशत से बढ़कर 58 प्रतिशत हो जाएगी।
कैबिनेट की मुहर, मंत्री ने दी जानकारी
कैबिनेट बैठक के बाद प्रेस ब्रीफिंग में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि सरकार ने कर्मचारियों और पेंशनरों को राहत देने के उद्देश्य से यह फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि इससे सरकारी कर्मचारियों को महंगाई से निपटने में मदद मिलेगी और पेंशनरों को भी अतिरिक्त राहत मिलेगी।
पहले भी हुआ था इजाफा
गत वर्ष दिवाली से पहले भी केंद्र सरकार ने डीए और डीआर में 3 फीसदी की बढ़ोतरी की थी। वहीं, इस साल 1 जनवरी 2025 से 2 फीसदी की वृद्धि पहले ही की जा चुकी है। यानी साल 2025 में अब तक कुल 5 फीसदी की वृद्धि की जा चुकी है।
नियम और प्रक्रिया
नियम के अनुसार, महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) की दरों में संशोधन हर साल दो बार—1 जनवरी और 1 जुलाई को किया जाना चाहिए। हालांकि, व्यवहार में सरकार अकसर इसकी घोषणा में 3 से 4 महीने की देरी कर देती है। ऐसे में कर्मचारियों और पेंशनरों के खाते में उस अवधि का एरियर जुड़ जाता है।
कर्मचारी संगठनों की नाराज़गी
केंद्र सरकार के कर्मचारियों के संगठन लंबे समय से इस देरी पर नाराज़गी जता रहे हैं।
कॉन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लॉइज एंड वर्कर्स के महासचिव एस.बी. यादव का कहना है कि सरकार जानबूझकर डीए/डीआर की घोषणा में देरी करती है। इससे सरकार को फायदा होता है क्योंकि इतने समय तक वह राशि सरकार के पास रहती है और उस पर ब्याज मिलता है।
उन्होंने कहा, “नियम के मुताबिक हर साल जनवरी और जुलाई से डीए में बढ़ोतरी लागू होनी चाहिए, लेकिन सरकार घोषणा करने में 3-4 माह लगा देती है। इस अवधि में सरकार का पैसा निवेश होकर अच्छा खासा ब्याज अर्जित करता है, जिससे कर्मचारियों और पेंशनरों का सीधा नुकसान होता है।”
रक्षा कर्मचारियों ने भी जताई चिंता
अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ (AIDEF) के महासचिव और जेसीएम (JCM) राष्ट्रीय परिषद के वरिष्ठ सदस्य सी. श्रीकुमार ने कहा कि सरकार को इस मामले में देरी नहीं करनी चाहिए। उनका कहना है, “जब नियम साफ है कि 1 जनवरी और 1 जुलाई से डीए बढ़ाना है, तो इसमें महीनों की देरी क्यों की जाती है? यह कर्मचारियों और पेंशनरों के हक़ का पैसा है।”
सरकार पर वित्तीय बोझ
डीए और डीआर में वृद्धि से सरकार पर हर साल हजारों करोड़ रुपये का वित्तीय बोझ पड़ता है। यही वजह है कि कई बार सरकार इस निर्णय में देरी कर देती है। वित्तीय विशेषज्ञों के मुताबिक, सरकार चाहती है कि बजट और राजस्व प्रबंधन संतुलित रहे, लेकिन इससे लाखों कर्मचारियों और पेंशनरों को नुकसान उठाना पड़ता है।
त्योहारों से पहले राहत
हालांकि देरी की शिकायतें लगातार उठती रही हैं, फिर भी त्योहारों के सीजन में हुई इस बढ़ोतरी ने कर्मचारियों और पेंशनरों के चेहरों पर मुस्कान ला दी है। दशहरा और दीपावली पर अतिरिक्त वेतन और पेंशन का फायदा सीधे तौर पर बाजार में खर्च बढ़ाएगा, जिससे आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। केंद्र सरकार का यह फैसला एक ओर जहां लाखों परिवारों को राहत देने वाला है, वहीं दूसरी ओर इससे सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव भी बढ़ेगा। कर्मचारी संगठनों का मानना है कि यदि सरकार नियमानुसार हर छह महीने में समय पर घोषणा करे तो विवाद और असंतोष खत्म हो सकते हैं। फिलहाल, त्योहारों से पहले डीए/डीआर में 3 फीसदी की बढ़ोतरी कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए किसी तोहफे से कम नहीं है।
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