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महाराष्ट्र में बड़ा राजनीतिक दांव: बाल ठाकरे राष्ट्रीय स्मारक ट्रस्ट का चेयरमैन बने उद्धव ठाकरे, फडणवीस सरकार का मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा फैसला

Published on: November 17, 2025
Big political stake in Maharashtra

द देवरिया न्यूज़/मुंबई: महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनावों के बीच राज्य सरकार ने एक अहम और चौंकाने वाला फैसला लिया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सरकार ने शिवसेना संस्थापक दिवंगत बालासाहेब ठाकरे की याद में बन रहे राष्ट्रीय स्मारक के लिए गठित ट्रस्ट का पुनर्गठन करते हुए उद्धव ठाकरे को इसका चेयरमैन नियुक्त कर दिया है। इस निर्णय को राजनीतिक गलियारों में फडणवीस का बड़ा मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है, क्योंकि यह फैसला ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में चुनावी सरगर्मी तेज है और जल्द ही मुंबई में भी चुनाव होने वाले हैं।

ट्रस्ट संरचना के पुनर्गठन का बड़ा असर

इस कदम के बाद शिवसेना (UBT) की अगुवाई करने वाले उद्धव ठाकरे अब स्मारक निर्माण की प्रत्यक्ष देखरेख करेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला उद्धव ठाकरे को एक मजबूत मुद्दे पर हमलावर होने से रोक देगा, क्योंकि उनकी अगुवाई वाला धड़ा अक्सर बालासाहेब की विरासत को लेकर सरकार पर आरोप लगाता रहा है। वहीं दूसरी ओर, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे भी बाल ठाकरे की मूल विचारधारा और विरासत पर दावा करते आए हैं। ऐसे में यह फैसला महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरण पैदा कर सकता है।


उद्धव ठाकरे बने चेयरमैन — ट्रस्ट के प्रमुख सदस्य

महाराष्ट्र सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, बालासाहेब ठाकरे राष्ट्रीय स्मारक सार्वजनिक न्यास का पुनर्गठन किया गया है। बैठक में शासन ने निम्न सदस्यों को नियुक्त किया:

नियुक्त पदाधिकारी व सदस्य

  • उद्धव ठाकरे – अध्यक्ष

  • सुभाष देसाई – सचिव

  • आदित्य ठाकरे – सदस्य

  • पराग अलवानी – सदस्य

  • शिशिर शिंदे – सदस्य

पदेन सदस्य (Ex-Officio)

  • महाराष्ट्र के मुख्य सचिव

  • प्रमुख सचिव (शहरी विकास–II)

  • प्रमुख सचिव (कानून एवं न्यायपालिका)

  • बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) आयुक्त

  • सामान्य निकाय द्वारा चुने जाने वाले दो सदस्य

कार्यकाल

  • उद्धव ठाकरे, सुभाष देसाई और आदित्य ठाकरे का कार्यकाल – 5 वर्ष

  • पराग अलवानी और शिशिर शिंदे का कार्यकाल – 3 वर्ष


स्मारक निर्माण कहाँ हो रहा है?

यह राष्ट्रीय स्मारक मुंबई के दादर इलाके में शिवाजी पार्क स्थित महापौर बंगले (Mayor’s Bungalow) में बनाया जा रहा है। यही स्थान शिवसेना और बाल ठाकरे की राजनीतिक यात्रा का प्रमुख केंद्र रहा है।


उद्धव ठाकरे पहले भी रहे चेयरमैन

गौरतलब है कि यह ट्रस्ट 27 सितंबर 2016 को गठित किया गया था और इसके पहले अध्यक्ष भी उद्धव ठाकरे ही थे।
2019 में मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने 25 नवंबर 2019 को पद छोड़ दिया था, जिसके बाद आदित्य ठाकरे को अध्यक्ष बनाया गया था।

ट्रस्ट के सदस्यों का पूर्व कार्यकाल 11 मार्च 2025 को समाप्त हो चुका था, इसलिए अब इसका पुनर्गठन आवश्यक हो गया था।

सरकार ने सुभाष देसाई को ट्रस्ट में हुए बदलावों को चैरिटी कमिश्नर के पास पंजीकृत कराने का अधिकार भी सौंपा है।


राजनीतिक मायने — क्यों चर्चा में आया यह फैसला?

  • चुनावी माहौल में यह कदम उद्धव को मजबूती देता है।

  • लेकिन साथ ही बाल ठाकरे की विरासत के मुद्दे पर वे अब सरकार पर सीधा हमला भी नहीं कर पाएंगे।

  • राजनीतिक विशेषज्ञ इसे रणनीतिक बैलेंसिंग एक्ट बताते हैं, जिसमें फडणवीस सरकार ने शिंदे और उद्धव दोनों धड़ों को साधने की कोशिश की है।


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