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हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: जातीय महिमामंडन पर लगेगा प्रतिबंध, स्कूलों में पढ़ाया जाएगा जातिवाद विरोधी पाठ

Published on: September 22, 2025
Big order of High Court
द देवरिया न्यूज़ इलाहाबाद ,हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक आदेश देते हुए केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वाहनों और सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर जातीय महिमामंडन से जुड़े प्रतीक, पोस्टर और स्लोगन पर तत्काल प्रतिबंध लगाया जाए। अदालत ने यह भी कहा कि सरकार स्कूलों में जातिवाद के खिलाफ विशेष पाठ और जागरूकता अभियान शुरू करे, ताकि नई पीढ़ी में सामाजिक समानता की सोच विकसित हो सके।
पुलिस दस्तावेजों में जाति का जिक्र बर्दाश्त नहीं
न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकलपीठ ने इटावा के शराब तस्करी मामले के आरोपी प्रवीण छेत्री की आपराधिक कार्यवाही रद्द करने से इंकार करते हुए यह आदेश दिया। सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस रिकॉर्ड में आरोपी की जाति लिखने पर कड़ी आपत्ति जताई। कोर्ट ने कहा कि यह प्रथा संवैधानिक भावना के खिलाफ है और तुरंत बंद की जानी चाहिए।
मार्च में कोर्ट ने डीजीपी से हलफनामा तलब कर पूछा था कि किस कानून में आरोपी की जाति पूछने का प्रावधान है। इस पर डीजीपी ने कहा था कि जाति से लोगों की पहचान करने में मदद मिलती है। कोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक के दौर में पुलिस के पास फिंगरप्रिंट, आधार, मोबाइल नंबर और माता-पिता के विवरण जैसे कई साधन हैं। ऐसे में जाति का उल्लेख करना उचित नहीं है।
पुलिस फॉर्म से हटाई जाए जाति-धर्म प्रविष्टि
हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि वह पुलिस फॉर्म से जाति और धर्म संबंधी प्रविष्टियां तत्काल हटाए। केवल अनुसूचित जाति/जनजाति से जुड़े विशेष मामलों में ही जाति का उल्लेख किया जाए। कोर्ट ने यह भी साफ कहा कि थानों में लगे जातीय महिमामंडन वाले साइन बोर्ड और पोस्टर भी तुरंत हटाए जाएं।
क्या है पूरा मामला
29 अप्रैल 2023 को इटावा में दो कारों से 300 बोतल अवैध शराब बरामद की गई थी। दोनों कारों पर फर्जी नंबर प्लेट लगी थीं। पुलिस ने प्रवीण छेत्री को इस गिरोह का सरगना बताया। हालांकि, छेत्री ने दावा किया कि वह पारिवारिक समारोह में गया था और केवल लिफ्ट ले रहा था, उसका शराब से कोई संबंध नहीं है। उसने ट्रायल कोर्ट में चल रही कार्यवाही को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। इसी सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस दस्तावेजों में जाति दर्ज करने की प्रथा पर गंभीर सवाल उठाए और यह अहम फैसला सुनाया।

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