पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के अनुसार, यह रणनीति 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों तथा 2021 के विधानसभा चुनावों के नतीजों और वोट अंतर के गहन अध्ययन पर आधारित है। इसका उद्देश्य उन विधानसभा क्षेत्रों को प्राथमिकता देना है, जहां भाजपा पहले जीत चुकी है या लगातार कड़ी टक्कर देती रही है।
‘संरचनात्मक रूप से कठिन’ सीटों को अलग रखा
भाजपा का मानना है कि राज्य में करीब 50 अल्पसंख्यक-बहुल विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जो संगठनात्मक और सामाजिक कारणों से ‘संरचनात्मक रूप से कठिन’ हैं। पार्टी के अनुसार, इन सीटों पर बूथ एजेंट तैनात करना, संगठन की निरंतर मौजूदगी बनाए रखना और मजबूत स्थानीय नेटवर्क का मुकाबला करना बड़ी चुनौती है। इस वजह से पार्टी ने इन सीटों को अपनी मुख्य चुनावी गणना से अलग रखने का फैसला किया है। भाजपा का तर्क है कि जब इन ‘मुश्किल’ सीटों को अलग कर दिया जाता है, तो सत्ता तक पहुंचने का रास्ता अधिक छोटा और स्पष्ट हो जाता है।
टीएमसी के कुशासन से तंग हैं लोग: सामिक भट्टाचार्य
राज्य भाजपा अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने कहा कि बंगाल के लोग बदलाव चाहते हैं, क्योंकि वे तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के कुशासन से परेशान हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी नई सीटों के साथ-साथ उन क्षेत्रों पर भी फोकस करेगी, जहां भाजपा पहले जीत चुकी है या जहां पिछले कुछ चुनावों में उसका वोट शेयर स्थिर रहा है या बढ़ा है।
आंतरिक आकलन में सामने आए आंकड़े
भाजपा के आंतरिक आकलन के अनुसार, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों तथा 2021 के विधानसभा चुनावों में पार्टी ने 60 विधानसभा क्षेत्रों में या तो जीत दर्ज की या बढ़त बनाई। इसके अलावा, करीब 40 सीटों पर पार्टी ने तीन में से दो चुनावों में जीत या बढ़त हासिल की। वहीं, इसी अवधि में 60 अन्य विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा ने कम से कम एक बार जीत या बढ़त दर्ज की है।
इन आंकड़ों के आधार पर भाजपा 2026 में अपने मजबूत और संभावनाशील क्षेत्रों पर केंद्रित होकर सत्ता की लड़ाई को धार देने की तैयारी में जुट गई है।