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क्‍वॉड पर अमेरिका की ठंडी पड़ती दिलचस्पी, चीन नीति में बदलाव से भारत समेत सहयोगियों की चिंता बढ़ी

Published on: March 26, 2026
America cools down on Quad
द  देवरिया न्यूज़,वॉशिंगटन/नई दिल्ली : हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने के लिए बनाए गए क्‍वॉड (Quad) समूह को लेकर अमेरिका की प्राथमिकता में कमी के संकेत मिल रहे हैं। अमेरिका, भारत, जापान और ऑस्‍ट्रेलिया के इस अहम मंच की शिखर बैठक 2024 के बाद से नहीं हुई है, जबकि अगली बैठक भारत में प्रस्तावित है। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से इसको लेकर उत्साह नहीं दिखने से इसके भविष्य को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप प्रशासन इस समय चीन के साथ संबंधों को सुधारने पर ज्यादा ध्यान दे रहा है। ट्रंप के जल्द ही चीन दौरे पर जाने की संभावना जताई जा रही है, जबकि भारत को लेकर ऐसी कोई योजना सामने नहीं आई है। इससे रणनीतिक समीकरणों में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं।

अमेरिकी अधिकारी के बयान में भी क्‍वॉड का जिक्र नहीं

भारत दौरे पर आए अमेरिकी रक्षा विभाग के सहायक मंत्री एल्ब्रिज कोल्बी ने अपने बयान में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत-अमेरिका सहयोग को महत्वपूर्ण बताया, लेकिन क्‍वॉड का कोई उल्लेख नहीं किया। उन्होंने कहा कि दोनों देश क्षेत्र में शक्ति संतुलन बनाए रखने के लिए सैन्य क्षमता के महत्व को समझते हैं और भारत को एक “जरूरी साझेदार” बताया।

कोल्बी ने यह भी कहा कि हर मुद्दे पर सहमति जरूरी नहीं होती, लेकिन प्रभावी सहयोग के लिए आपसी समझ अहम है। उनके इस बयान को अमेरिका के पहले दिए गए कुछ विवादित बयानों के बाद “डैमेज कंट्रोल” के रूप में भी देखा जा रहा है।

भारत के लिए क्यों अहम है क्‍वॉड?

भारत इस साल क्‍वॉड शिखर बैठक की मेजबानी की उम्मीद कर रहा है और यह भी माना जा रहा था कि ट्रंप इसमें हिस्सा लेने भारत आ सकते हैं। ऐसे में अमेरिका की उदासीनता नई दिल्ली के लिए चिंता का विषय बन सकती है।

विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका-चीन संबंधों में हालिया नरमी भी इसका एक कारण हो सकती है। अक्टूबर 2025 में ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात के बाद दोनों देशों के रिश्तों में कुछ सुधार देखने को मिला है, जिससे क्‍वॉड की प्रासंगिकता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

जापान और ताइवान पर भी असर

क्‍वॉड को चीन के बढ़ते दबदबे के खिलाफ एक महत्वपूर्ण रणनीतिक मंच माना जाता रहा है। ऐसे में अमेरिका की प्राथमिकताओं में बदलाव से जापान और ताइवान जैसे देशों को भी झटका लग सकता है, जो चीन के बढ़ते प्रभाव को लेकर पहले से चिंतित हैं। क्‍वॉड की स्थापना 2007 में हुई थी और पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन के कार्यकाल में इसे विशेष महत्व मिला था। लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में इसकी सक्रियता और भविष्य दोनों ही अनिश्चित नजर आ रहे हैं।

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