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अहमदाबाद विमान हादसे के छह महीने बाद भी नहीं संभल पाए इकलौते जीवित बचे विश्वास भालिया, बोले- “बच गया, पर अब हर दिन सजा जैसा लगता है

Published on: November 5, 2025
Ahmedabad plane crash six

द देवरिया न्यूज़ : अहमदाबाद विमान हादसे को पूरे छह महीने बीत चुके हैं, लेकिन उस भयावह घटना के इकलौते जीवित बचे व्यक्तिविश्वास कुमार भालिया — आज भी उस मंजर से बाहर नहीं निकल पाए हैं। हादसे के बाद उनका जीवन अब एक ओर ‘चमत्कार’ तो दूसरी ओर ‘सजा’ जैसा बन गया है। वह अब ब्रिटेन के लीसेस्टर लौट चुके हैं, लेकिन वहां भी पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD) से जूझ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि विश्वास गंभीर मानसिक आघात से गुजर रहे हैं, उन्हें चलने-फिरने में परेशानी होती है और उनकी पत्नी हर कदम पर उनकी मदद करती हैं। परिवार के मुताबिक, वे अक्सर रात में डरकर उठ जाते हैं और बार-बार उसी हादसे के दृश्यों को याद करते हैं।


12 जून को हुआ था भीषण विमान हादसा

12 जून को एअर इंडिया की अहमदाबाद से लंदन जा रही फ्लाइट (AI-171) क्रैश हो गई थी। विमान में 230 यात्री और 12 क्रू मेंबर, कुल 242 लोग सवार थे। इनमें से 241 लोगों की मौत हो गई थी — केवल विश्वास कुमार भालिया ही जीवित बचे थे। इस हादसे में उनके भाई अजय भालिया की भी मौत हो गई थी। विश्वास फ्लाइट की सीट 11A पर बैठे थे। विमान दुर्घटना के बाद उसके खोल में बने एक छेद से बाहर निकलने में वे किसी तरह सफल हुए। लेकिन उनके पैर, घुटने, कंधे और पीठ पर गंभीर चोटें आईं।


“अब कमरे में अकेला बैठा रहता हूं” — विश्वास

विश्वास ने बताया, “हादसे के बाद से मैं किसी से ज्यादा बात नहीं करता। कमरे में अकेला बैठा रहता हूं। पत्नी और बेटे से भी बातचीत नहीं होती। मां रोज दरवाजे पर बैठती हैं, पर किसी से कुछ नहीं कहतीं। हमारे लिए हर दिन दर्द से भरा है।”


परिवार का कारोबार भी बंद

विश्वास के परिवार का गुजरात के दीव में मछली पालन का कारोबार था, जो अब पूरी तरह बंद हो गया है। विश्वास के वकील रैड सीगर ने एअर इंडिया के सीईओ कैंपबेल विल्सन से मुलाकात कर परिवार की मदद के लिए विशेष राहत पैकेज की मांग की है।


मिले 21,500 पाउंड, लेकिन वकील बोले—“यह बहुत कम है”

एअर इंडिया ने परिवार को 21,500 पाउंड (करीब 22 लाख रुपये) का अंतरिम मुआवजा दिया है। हालांकि, वकील रैड सीगर ने कहा कि यह रकम विश्वास के लंबे मानसिक और शारीरिक इलाज के लिए बहुत कम है। उन्होंने बताया कि ब्रिटेन की नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS) भी उन्हें पर्याप्त चिकित्सा सुविधा नहीं दे पा रही है।

सीगर ने कहा, “विश्वास की हालत नाजुक है। उन्हें मानसिक और शारीरिक दोनों स्तर पर गंभीर सहायता की जरूरत है।”


एअर इंडिया बोली — “हम परिवारों के संपर्क में हैं”

एअर इंडिया ने बयान जारी कर कहा कि कंपनी हादसे से प्रभावित सभी परिवारों की पूरी जिम्मेदारी समझती है।

“95% पीड़ित परिवारों को शुरुआती मुआवजा दिया जा चुका है। टाटा समूह के वरिष्ठ अधिकारी लगातार परिवारों से मिल रहे हैं। विश्वास कुमार के परिवार से मिलने का भी प्रस्ताव दिया गया है।”


परिवार बोला — “बेटा कमरे से बाहर नहीं निकलता”

विश्वास के पिता रमेशभाई भालिया ने कहा, “बेटा अब अपने कमरे से बाहर नहीं निकलता। वह अक्सर चुप रहता है और किसी से बात नहीं करता। हादसे में उसके भाई की भी मौत हो गई। दोनों भाई जिगरी दोस्त जैसे थे। एक के जाने और दूसरे के बचने ने पूरे परिवार को तोड़ दिया है।” उन्होंने कहा कि पत्नी भी अब बीमार रहने लगी हैं, खाना-पीना छूट गया है और हर दिन एक अदृश्य भय में बीत रहा है।


“आधी रात को डरकर उठ जाता है” — चचेरे भाई सनी

चचेरे भाई सनी भालिया ने बताया, “विश्वास को अब तक नींद नहीं आती। कई बार रात में अचानक चौंककर उठ जाता है और फिर पूरी रात नहीं सो पाता। हमने उसे कई बार मनोचिकित्सक के पास ले जाया, लेकिन अब वह लोगों से बात ही नहीं करना चाहता।”


परिवार का लंदन-दीव कनेक्शन

विश्वास की मौसी रमाबेन भालिया ने बताया कि परिवार के मुखिया रमेशभाई पिछले 25 साल से लंदन में रह रहे हैं। उनके चार बेटे — विश्वास, अजय, सनी और नयन — सभी ब्रिटिश नागरिक हैं।
विश्वास और अजय हर साल 6–7 महीने दीव में रहते थे और मछली पालन का काम करते थे, जबकि 4–5 महीने लंदन में। हादसे में बचे विश्वास का तीन साल का बेटा है, जबकि उनके भाई अजय की दो बेटियां बीमारी के कारण पहले ही गुजर चुकी हैं


हादसे में गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री का भी निधन

यह हादसा इतना भयानक था कि विमान अहमदाबाद मेडिकल कॉलेज के छात्रावास से टकरा गया, जिससे 29 डॉक्टरों और छात्रों की मौत हो गई। दुर्घटना में गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी का भी निधन हो गया था। कुल मिलाकर इस हादसे में 270 लोगों की जान चली गई — और सिर्फ एक व्यक्ति, विश्वास कुमार भालिया, जीवित बच सके।


एक चमत्कार, जो जीवनभर का दर्द बन गया

विश्वास के लिए इस हादसे से बचना किसी चमत्कार से कम नहीं, लेकिन अब यह जीवनभर की सजा बन गया है।

“मैं बच गया, लेकिन सबकुछ खो दिया। अब हर दिन ऐसा लगता है जैसे फिर वही हादसा दोहराया जा रहा हो।” — विश्वास कुमार भालिया


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