द देवरिया न्यूज़ : सुप्रीम कोर्ट द्वारा परिषदीय शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को अनिवार्य किए जाने के फैसले से उत्तर प्रदेश के लाखों शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं। इसी के मद्देनज़र अब प्रभावित शिक्षक भी सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाने लगे हैं। प्रदेश सरकार पहले ही पुनर्विचार याचिका दाखिल कर चुकी है, और अब यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन (यूटा) ने भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। कई अन्य संगठन भी इस दिशा में तैयारी कर रहे हैं।
नियुक्त शिक्षकों को राहत की मांग
यूटा पदाधिकारियों का कहना है कि प्रदेश के अनेक शिक्षक ऐसे हैं जो टीईटी के लिए आवेदन ही नहीं कर सकते। 2001 से पहले इंटर और बीटीसी के आधार पर नियुक्त शिक्षक, जिनकी सेवा अवधि पांच वर्ष से अधिक हो चुकी है, या फिर मृतक आश्रित कोटे में केवल इंटर शैक्षिक योग्यता पर नौकरी पाए अध्यापक, टीईटी परीक्षा के लिए अर्ह नहीं हैं। ऐसे शिक्षकों को विशेष राहत मिलनी चाहिए।
संगठन के नेता सतेंद्र पाल सिंह ने स्पष्ट कहा कि यूटा न्यायालय के साथ-साथ सड़क पर भी इस लड़ाई को लड़ेगा और जल्द ही बड़े आंदोलन का ऐलान किया जाएगा। जानकारी के अनुसार, प्रदेश के लगभग 1.86 लाख शिक्षक इस फैसले से प्रभावित हैं।
अन्य संगठनों की पहल
विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री और केंद्रीय शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर इस मामले में पुनर्विचार याचिका दायर करने की मांग की है।
वहीं, उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ (तिवारी गुट) ने भी सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू याचिका दाखिल की है। संगठन के अध्यक्ष विनय तिवारी के साथ संरक्षक व एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह, अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष वासवराज गुरिकर और महासचिव कमलाकांत त्रिपाठी भी मौजूद रहे।
आंदोलन की तैयारी
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा ने बताया कि संगठन भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करेगा। साथ ही, आंदोलन की रणनीति बनाने के लिए 5 अक्टूबर को दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में विभिन्न राज्यों के शिक्षक संगठनों की बैठक बुलाई गई है। इसमें झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, महाराष्ट्र आदि राज्यों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। यदि तब तक केंद्र सरकार सकारात्मक पहल नहीं करती, तो शिक्षक संगठन दिल्ली कूच की तिथि घोषित करेंगे।
झारखंड का रुख अलग
जहां यूपी सरकार सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल कर चुकी है, वहीं झारखंड सरकार ने ऐसा न करने का फैसला किया है। सरकार का कहना है कि ज्यादातर मामलों में पुनर्विचार याचिकाएं खारिज हो जाती हैं। इसलिए शिक्षकों को टीईटी की तैयारी करनी चाहिए, क्योंकि उन्हें साल में दो बार परीक्षा का अवसर मिलेगा।
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