द देवरिया न्यूज़,लखनऊ। मशहूर शायर मुनव्वर राना की बेटी और समाजवादी पार्टी (सपा) महिला सभा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुमैय्या राना ने लखनऊ पुलिस पर उन्हें कथित तौर पर नजरबंद करने का गंभीर आरोप लगाया है। हालांकि, पुलिस प्रशासन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है।
सुमैय्या राना ने बताया कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम के दौरान एक नव नियुक्त मुस्लिम महिला चिकित्सक का नकाब हटाने और उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री डॉ. संजय निषाद की कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के विरोध में उन्होंने 16 दिसंबर को लखनऊ के कैसरबाग थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग की थी। उनका आरोप है कि पुलिस न तो उनकी शिकायत पर मुकदमा दर्ज कर रही है और न ही उन्हें स्वतंत्र रूप से बाहर जाने दिया जा रहा है।
फोन पर बातचीत में सुमैय्या राना ने कहा, “मैं कल से नजरबंद हूं। मेरे घर के बाहर पुलिस तैनात है, लेकिन इसे आधिकारिक रूप से स्वीकार नहीं किया जा रहा। मैंने अपने घर पर सीसीटीवी भी लगवाया है, जिससे साफ दिखाई देता है कि पुलिसकर्मी लगातार मौजूद हैं।” उन्होंने कहा कि यदि यह नजरबंदी नहीं है, तो फिर इसे क्या कहा जाए।
राना ने यह भी दावा किया कि कथित घटनाओं से आहत होकर संबंधित महिला चिकित्सक कोलकाता चली गईं और उन्होंने नौकरी छोड़ दी। हालांकि, इस संबंध में महिला चिकित्सक की ओर से कोई सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है। वहीं बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने पहले ही कहा है कि उन्हें ऐसी किसी जानकारी का संज्ञान नहीं है कि संबंधित चिकित्सक ने सरकारी नौकरी जॉइन करने से इनकार किया हो।
सपा नेता ने कहा कि वह स्वयं हिजाब पहनती हैं और उसी समाज से आती हैं, इसलिए इस मामले को लेकर उन्हें गहरी पीड़ा हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक विशेष धर्म के खिलाफ अपमानजनक व्यवहार और बयान देकर समाज में नफरत फैलाने की कोशिश की गई।
सुमैय्या राना ने पुलिस आयुक्त के समक्ष शिकायत दर्ज कराने की बात कही है। उन्होंने पुलिस आयुक्त को दी जाने वाली तहरीर भी साझा की है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि पटना में आयुष चिकित्सकों के नियुक्ति पत्र वितरण के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने डॉ. नुसरत परवीन नामक मुस्लिम महिला चिकित्सक का सार्वजनिक रूप से नकाब हटाकर उनका अपमान किया। तहरीर में यह भी कहा गया है कि इस घटना के जरिए धार्मिक उन्माद फैलाने और राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास किया गया।
शिकायत में उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद के कथित बयान को भी शामिल किया गया है, जिसे समूचे मुस्लिम समाज के अपमान का प्रयास बताया गया है। राना का दावा है कि उन्होंने इस संबंध में फोटो और बयान के अंश भी तहरीर के साथ संलग्न किए हैं।
वहीं इस पूरे मामले पर सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) रत्नेश सिंह ने सुमैय्या राना को नजरबंद किए जाने के आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि थाना प्रभारी की ओर से ऐसी किसी भी तरह की सूचना नहीं दी गई है और नजरबंदी के आरोप निराधार हैं।
फिलहाल, यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है, जबकि पुलिस और सपा नेता के दावों में विरोधाभास साफ नजर आ रहा है।
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