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लोकसभा में ई-सिगरेट पीने का वीडियो वायरल, टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद पर कार्रवाई की तलवार

Published on: December 19, 2025
Smoking e-cigarette in Lok Sabha

द देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली : लोकसभा के भीतर ई-सिगरेट पीते हुए कथित वीडियो वायरल होने के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद कीर्ति आजाद की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। इस मामले में पार्टी का रुख भी साफ संकेत दे रहा है कि उन्हें वैसा राजनीतिक संरक्षण नहीं मिलेगा, जैसा पहले अन्य मामलों में पार्टी सांसदों को मिला है। अब पूरे प्रकरण में अगला कदम लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के निर्णय पर निर्भर करेगा।

यह वीडियो बुधवार (17 दिसंबर, 2025) को सोशल मीडिया पर सामने आया, जिसे भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अपने आधिकारिक एक्स (पूर्व ट्विटर) हैंडल पर साझा किया। हालांकि, इस मुद्दे की गूंज लोकसभा में इससे पहले ही 11 दिसंबर को सुनाई देने लगी थी।

स्पीकर से कार्रवाई की मांग

बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने शून्य काल के दौरान बिना नाम लिए सदन में यह मुद्दा उठाया था और ई-सिगरेट पीने वाले टीएमसी सांसद के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की थी। उन्होंने लोकसभा नियमों के तहत कार्रवाई की अपील की, जिस पर स्पीकर ओम बिरला ने लिखित शिकायत मिलने पर कदम उठाने का आश्वासन दिया था।
इसके बाद अनुराग ठाकुर ने औपचारिक रूप से लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिसमें कहा गया कि सत्र के दौरान टीएमसी के एक सांसद को खुलेआम ई-सिगरेट पीते देखा गया।

टीएमसी का रुख

मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए टीएमसी के लोकसभा नेता अभिषेक बनर्जी ने कहा कि अगर आरोपों से जुड़ा पूरा और विश्वसनीय वीडियो साक्ष्य सामने आता है, तो पार्टी उचित कार्रवाई करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया,

“हम ऐसे व्यवहार को प्रोत्साहित नहीं करते। संसद स्मोकिंग की जगह नहीं है। हम सदन की गरिमा और नियमों का सम्मान करते हैं।”
बाद में वीडियो सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया।

ई-सिगरेट पर क्या कहता है कानून?

संयोग से इसी दिन राज्यसभा में भी ई-सिगरेट से जुड़े कानून पर चर्चा हुई। केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने बताया कि प्रोहिबिशन ऑफ इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट एक्ट, 2019 (PECA) के तहत देश में ई-सिगरेट के उत्पादन, निर्माण, आयात, निर्यात, बिक्री, भंडारण और प्रचार पर प्रतिबंध है।
हालांकि, कानून में ई-सिगरेट के इस्तेमाल को सीधे तौर पर अपराध नहीं माना गया है, जिससे यह मामला कानूनी से ज्यादा संसदीय मर्यादा और आचरण से जुड़ जाता है।

हो सकती है अनुशासनात्मक कार्रवाई

विशेषज्ञों के अनुसार, भले ही ई-सिगरेट पीना तकनीकी रूप से आपराधिक न हो, लेकिन सदन के भीतर ऐसा आचरण संसद की गरिमा के उल्लंघन के दायरे में आता है।
लोकसभा स्पीकर के पास सांसद के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने, सीमित अवधि के लिए निलंबन या मामले को एथिक्स कमेटी को भेजने का अधिकार है। समिति जांच के बाद सख्त कार्रवाई की सिफारिश कर सकती है। अब सभी की नजरें स्पीकर ओम बिरला के फैसले पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि कीर्ति आजाद पर किस स्तर की कार्रवाई होती है।


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