द देवरिया न्यूज़ /नई दिल्ली: भारत पूर्वोत्तर की संवेदनशील सीमाओं के पास अपनी सबसे व्यापक एयर कॉम्बैट ड्रिल शुरू करने जा रहा है। भारतीय वायुसेना (IAF) ने 13 से 20 नवंबर तक अभ्यास के लिए NOTAM जारी कर दिया है। राफेल, तेजस, सुखोई-30MKI, मिराज-2000 और जगुआर जैसे घातक जंगी विमान एयरबेस पर पहुंच चुके हैं। यह पूरा क्षेत्र चीन, भूटान, म्यांमार और बांग्लादेश से लगा हुआ रणनीतिक इलाका है—और यही वजह है कि इस अभ्यास को केवल सैन्य नहीं, बल्कि एक कड़ा राजनीतिक संदेश भी माना जा रहा है।
गुवाहाटी एयर शो—राफेल और तेजस की गूंज से कांपा आसमान
असम के गुवाहाटी में वायुसेना की 93वीं वर्षगांठ पर आयोजित एयर शो में राफेल, तेजस और सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम ने ब्रह्मपुत्र नदी के ऊपर फ्लाईपास्ट कर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने विमानों के युद्धाभ्यास और समन्वय की खुलकर सराहना की।
अधिकारियों के अनुसार—
✅ 58 विमान शामिल
✅ 25 से अधिक फॉर्मेशन
✅ लड़ाकू और परिवहन दोनों प्रकार के एयरक्राफ्ट
डिफेंस एक्सपर्ट लेफ्टिनेंट कर्नल (रि.) जेएस सोढ़ी का कहना है कि
“राफेल–तेजस की दहाड़ तो बस ट्रेलर है… असली मेसेज 8 दिन चलने वाले वॉर गेम्स देंगे।”
बांग्लादेश को सीधी चेतावनी? यूनुस के विवादित नक्शे पर भारत का जवाब
अभ्यास ऐसे समय में हो रहा है जब बांग्लादेश के अंतरिम नेता मोहम्मद यूनुस ने
पाकिस्तानी सेना के एक जनरल
तुर्की प्रतिनिधिमंडल
के साथ बैठक में एक विवादित नक्शा साझा किया था, जिसमें असम को बांग्लादेश का हिस्सा दिखाया गया था।
यूनुस ने यहां तक कहा कि भारत के पूर्वोत्तर राज्य “स्थलरुद्ध” हैं और चीन को बातचीत के लिए बुलाया।
यह बयान और नक्शा भारत के लिए रणनीतिक खतरे के रूप में देखा गया—खासकर सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) को लेकर।
जेएस सोढ़ी स्पष्ट कहते हैं—
“असम के आसमान में राफेल–तेजस की दहाड़ यूनुस के लिए सीधी चेतावनी है।”
टू-फ्रंट वॉर की तैयारी—चीन और पाकिस्तान पर नजर
डिफेंस विश्लेषकों के अनुसार, भारत का यह कदम
चीन
पाकिस्तान
और हाल में अस्थिर बांग्लादेश
तीनों को एक साथ संदेश देता है।
सोढ़ी के मुताबिक—
“पहली बार पूर्वोत्तर सीमाओं पर इतने बड़े स्तर का युद्धाभ्यास दिखाता है कि भारत 2030 के बाद संभावित टू-फ्रंट वॉर की तैयारी कर रहा है। चीन–भारत सीमा के सभी हिस्से—लद्दाख से अरुणाचल तक—सुपर सेंसिटिव हैं, और यह ड्रिल उसी तैयारी का हिस्सा है।”
युद्धाभ्यास सिर्फ सैन्य नहीं—स्पष्ट भू-राजनीतिक संकेत
अभ्यास में शामिल होंगे:
✅ एयर डिफेंस सिस्टम
✅ एकीकृत संयुक्त अभियान
✅ वास्तविक युद्ध जैसे मिशन
✅ हाई-इंटेंसिटी कॉम्बैट फ्लाइट्स
अधिकारियों का कहना है कि यह अभ्यास केवल क्षमता–प्रदर्शन नहीं, बल्कि स्पष्ट राजनीतिक संदेश है—
भारत किसी भी परिस्थिति में अपनी सीमाओं की सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा।
त्रिशूल युद्धाभ्यास भी जारी
इसी बीच भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना एक साथ एक संयुक्त युद्धाभ्यास कर रही हैं—
✅ नाम: एक्स–त्रिशूल
✅ अवधि: 30 अक्टूबर – 10 नवंबर
✅ स्थान: जैसलमेर से गुजरात के सर क्रीक तक विस्तृत क्षेत्र
✅ उद्देश्य: बॉर्डर पर नो-फ्लाई ज़ोन और उच्च स्तरीय संयुक्त लड़ाकू तैयारी
NOTAM के अनुसार, इस क्षेत्र में किसी भी नागरिक विमान की आवाजाही प्रतिबंधित है।
संदेश साफ—भारत तैयार है
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि
चीन की आक्रामकता,
पाकिस्तान की अस्थिरता,
और बांग्लादेश में बढ़ते भू-राजनीतिक हस्तक्षेप
को ध्यान में रखते हुए यह अभ्यास समय की मांग है।
राफेल, तेजस और सुखोई की लगातार गर्जना न केवल भारतीय नागरिकों का मनोबल बढ़ाती है,
बल्कि पड़ोसी देशों को यह स्पष्ट संकेत देती है कि—
भारत शांतिप्रिय है, पर कमजोर नहीं।
जवाबी कार्रवाई के लिए सदैव तैयार है।
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