द देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली: भारत का आयात बिल एक बार फिर तेज़ी से बढ़ रहा है। इसकी तीन बड़ी वजहें हैं—महंगा सोना, कच्चे तेल के ऊंचे दाम और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स पर भारी विदेशी निर्भरता। इन तीनों पर रुपये की कमजोरी ने और दबाव बढ़ा दिया है। परिणामस्वरूप देश का व्यापार घाटा अक्टूबर में रिकॉर्ड 41.68 अरब डॉलर पर पहुंच गया।
इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों का भारी आयात
एपल, सैमसंग, एलजी, हायर, लेनोवो, व्हर्लपूल और मोटोरोला जैसी कंपनियों ने वित्त वर्ष 2024-25 में 1.21 लाख करोड़ रुपये से अधिक के इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स और उत्पाद आयात किए—जो पिछले वर्ष की तुलना में 13% ज्यादा है।
उद्योग विशेषज्ञों के मुताबिक यह बढ़ोतरी महंगे पार्ट्स, ऊँची डॉलर कीमत और रुपये की कमजोरी का परिणाम है।
1. रुपये की कमजोरी: आयात महंगा होने की सबसे बड़ी वजह
रुपया डॉलर के मुकाबले 90 से नीचे चला गया है और एशिया की सबसे कमजोर मुद्राओं में शामिल हो गया है। कमजोर रुपये से:
कच्चा तेल
सोना
इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स
जैसे सभी आयातित सामान और महंगे हो जाते हैं।
मंगलवार को रुपया 10 पैसे और गिरकर 90.15 पर पहुंच गया।
फॉरेक्स विशेषज्ञों का कहना है कि डॉलर की बढ़ती मांग, एफआईआई की बिकवाली और भारत–अमेरिका व्यापार वार्ता को लेकर अनिश्चितता ने रुपये पर दबाव बढ़ाया है।
आरबीआई ने साफ किया है कि वह रुपये का कोई निश्चित स्तर तय नहीं करता—बाज़ार ही दरें तय करता है।
2. सोने की कीमतों में उछाल का असर
वैश्विक अनिश्चितता के कारण गोल्ड स्पॉट प्राइस $4,210/औंस के आसपास पहुंच गया है।
भारत में:
सोना: ₹1,32,600 प्रति 10 ग्राम
चांदी: ₹1,85,000 प्रति किलो
अंतरराष्ट्रीय बाजार महंगा होने से भारत को समान मात्रा के सोने के लिए अधिक डॉलर देने पड़ रहे हैं, जिससे आयात बिल तेजी से बढ़ रहा है।
3. इलेक्ट्रॉनिक्स आयात: ‘मेक इन इंडिया’ के बावजूद निर्भरता बरकरार
भारत अभी भी हाई-वैल्यू कंपोनेंट्स जैसे—
चिप्स
डिस्प्ले पैनल
कैमरा सेंसर
एसी कंप्रेसर
का अधिकांश हिस्सा आयात करता है।
कुछ कंपनियों में सुधार:
| कंपनी | आयात भार में कमी |
|---|---|
| Apple | 60% → 23% |
| Samsung | 67% → 60% |
| Blue Star | 25% → 16% |
| Havells | 17% → 13% |
वहीं कुछ कंपनियों में प्रगति बहुत कम:
LG — कोई कमी नहीं
Lenovo — कोई कमी नहीं
Voltas — 9% से बढ़कर 15%
उद्योग का मानना है कि लोकल कंपोनेंट इकोसिस्टम को परिपक्व होने में अभी वर्षों लगेंगे।
4. कच्चे तेल का आयात: कमजोर रुपये के साथ ‘डबल झटका’
भारत अपनी जरूरत का 85% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है।
भले ही ब्रेंट क्रूड $63–64 प्रति बैरल है, लेकिन कमजोर रुपये के कारण इसकी वास्तविक लागत कई गुना बढ़ जाती है।
यह भारत के लिए डबल झटका है:
1️⃣ प्रति बैरल अधिक डॉलर चुकाने पड़ते हैं
2️⃣ प्रति डॉलर अधिक रुपये देने पड़ते हैं
व्यापार घाटा लगातार बढ़ रहा है
वर्षवार व्यापार घाटा:
2021-22: $191.05 अरब
2022-23: $266.78 अरब
2023-24: $240.17 अरब
अप्रैल–अक्टूबर 2024 अवधि:
आयात: $451.08 अरब
व्यापार घाटा: $196.82 अरब
कुल स्थिति
रुपये की कमजोरी, सोने और इलेक्ट्रॉनिक्स का बढ़ता आयात और कच्चे तेल की भारी लागत—इन सबने भारत के बाहरी संतुलन पर गंभीर दबाव बना दिया है। निकट भविष्य में इस दबाव के कम होने की संभावना बेहद कम दिख रही है।
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