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भारत 2024-25 में खरीदेगा 1.20 लाख करोड़ के स्वदेशी सैन्य उपकरण: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

Published on: October 8, 2025
India will buy in 2024-25
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को कहा कि भारत तेजी से रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में देश 1.20 लाख करोड़ रुपये मूल्य के घरेलू सैन्य उपकरण और हथियार खरीदेगा। यह निर्णय न केवल आर्थिक दृष्टि से बल्कि रणनीतिक आत्मनिर्भरता की दिशा में भी एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार युद्ध के बदलते स्वरूप, विशेषकर ड्रोन और गैर-संपर्क तकनीकों की बढ़ती अहमियत को समझते हुए अपनी सैन्य तैयारियों को आधुनिक रूप दे रही है।
घरेलू सैन्य खरीद में हुआ बड़ा इजाफा
राजनाथ सिंह ने बताया कि वर्ष 2021-22 में भारत ने 74 हजार करोड़ रुपये मूल्य के घरेलू सैन्य उपकरण खरीदे थे, जबकि 2024-25 के अंत तक यह आंकड़ा 1.20 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
उन्होंने कहा, “यह केवल आंकड़ों में बढ़ोतरी नहीं, बल्कि सोच और दृष्टिकोण में बदलाव का प्रतीक है। अब देश रक्षा जरूरतों के लिए विदेशों पर निर्भर रहने के बजाय अपने स्वदेशी उद्योगों पर भरोसा कर रहा है।”
रक्षा मंत्री ने बताया कि मोदी सरकार के पिछले 10 वर्षों में देश में रक्षा उत्पादन के स्वदेशी डिजाइन, विकास और निर्माण को बढ़ावा देने के लिए कई नीतिगत सुधार किए गए हैं। इन सुधारों में रक्षा उपकरणों की खरीद में ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की भावना को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।
तकनीकी युद्ध और ड्रोन की भूमिका
राजनाथ सिंह ने आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अब युद्ध केवल सीमाओं पर आमने-सामने नहीं लड़े जाते, बल्कि तकनीक ने इसका स्वरूप बदल दिया है।
उन्होंने कहा, “आज का युद्ध टेक्नोलॉजी-ड्रिवन हो गया है। हमने हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान देखा कि ड्रोन, ड्रोन-रोधी प्रणाली और वायु-रक्षा तकनीकें कितनी अहम हो गई हैं। आने वाले समय में गैर-संपर्क युद्ध (Non-contact Warfare) की भूमिका और भी बढ़ेगी।”
2047 तक विकसित राष्ट्र बनने में रक्षा क्षेत्र की भूमिका
रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत को 2047 तक विकसित देश बनाने की दिशा में रक्षा क्षेत्र की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी।
उन्होंने कहा, “अगर हमें वैश्विक स्तर पर मजबूत बनना है, तो हमें तीन प्रमुख लक्ष्यों पर काम करना होगा —
  1. रक्षा क्षमताओं में आत्मनिर्भरता हासिल करना,
  2. वैश्विक रक्षा निर्यातक के रूप में उभरना,
  3. अत्याधुनिक तकनीकी क्षेत्रों में अग्रणी बनना।”
नीतिगत सुधार और आत्मनिर्भरता की दिशा
राजनाथ सिंह ने बताया कि रक्षा मंत्रालय ने अब कई विदेशी कंपनियों के साथ साझेदारी के बजाय भारतीय निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को प्राथमिकता दी है। डिफेंस कॉरिडोर, रक्षा स्टार्टअप्स और इनोवेशन मिशन जैसी योजनाएं देश में नई तकनीकों को प्रोत्साहित कर रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत अब न केवल स्वदेशी रक्षा जरूरतें पूरी कर रहा है, बल्कि अन्य देशों को भी रक्षा उपकरणों का निर्यात कर रहा है, जिससे भारत वैश्विक स्तर पर एक विश्वसनीय रक्षा साझेदार के रूप में उभर रहा है।
कुल मिलाकर, राजनाथ सिंह के बयान ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत अब आयातक देश से निर्यातक देश बनने की दिशा में मजबूत कदम बढ़ा चुका है और आने वाले वर्षों में रक्षा क्षेत्र भारत की आर्थिक और सामरिक शक्ति का प्रमुख आधार बनेगा।

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