द देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली: रूस पर लगे कड़े प्रतिबंधों की वजह से भारतीय तेल कंपनियों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। अब उन्हें कच्चा तेल खरीदने के लिए दूर-दराज़ के देशों का रुख करना पड़ रहा है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत ने गुयाना से कच्चा तेल खरीदना शुरू कर दिया है। गुयाना से दो बड़े टैंकर—कोबाल्ट नोवा और ओलंपिक लायन—करीब 11,000 मील (17,700 किलोमीटर) की दूरी तय करते हुए भारत के लिए रवाना हुए हैं।
बीते कुछ वर्षों से भारत रूस से सस्ते दामों पर कच्चा तेल खरीदता रहा है, लेकिन अमेरिका ने रूस के तेल पर प्रतिबंध और कड़े कर दिए हैं। इससे भारतीय रिफाइनरियों के लिए रूसी तेल आयात करना जोखिम भरा हो गया है। ब्लूमबर्ग के शिप-ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक दोनों टैंकर नवंबर के आखिरी दिनों में गुयाना से निकले थे। प्रत्येक टैंकर में करीब 20 लाख बैरल कच्चा तेल भरा है और इनके जनवरी में भारत पहुंचने की उम्मीद है।
यह गुयाना से भारत को भेजी गई पहली खेप नहीं है। वर्ष 2021 में भी गुयाना से दो टैंकर भारत आए थे, जिनमें प्रत्येक में 10 लाख बैरल कच्चा तेल था। पहले भारत रोजाना लगभग 17 लाख बैरल रूसी कच्चा तेल आयात करता था, लेकिन पिछले महीने अमेरिका ने रूस की दो प्रमुख तेल कंपनियों—रोसनेफ्ट और लुकोइल—पर नए प्रतिबंध लागू कर दिए। अगर भारतीय रिफाइनरियां इन कंपनियों से तेल खरीदना जारी रखतीं, तो उन्हें भी गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता था।
रूस से तेल खरीदने की चिंता इसलिए भी बढ़ गई थी क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से होने वाले सभी आयात पर टैरिफ को 50% तक बढ़ा दिया था, जिसमें रूसी तेल पर 25% अतिरिक्त टैरिफ शामिल है।
ओलंपिक लायन टैंकर गुयाना के गोल्डन एरोहेड क्रूड को लेकर भारत के पूर्वी तट स्थित पारादीप की ओर बढ़ रहा है। यहां इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन की 30 लाख बैरल प्रतिदिन क्षमता वाली रिफाइनरी है। IOC ने अक्टूबर में एक्सॉनमोबिल से यह कच्चा तेल टेंडर के जरिए खरीदा था।
वहीं, कोबाल्ट नोवा टैंकर में लिजा और यूनिटी गोल्ड ग्रेड का मिश्रित कच्चा तेल है, जो संभवतः मुंबई या विशाखापट्टनम में उतारा जाएगा। इन दोनों स्थानों पर हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) की रिफाइनरियां हैं। HPCL ने इन दोनों ग्रेड के 10-10 लाख बैरल कच्चे तेल की खरीद की है, जिनकी डिलीवरी दिसंबर अंत से जनवरी की शुरुआत तक मिलेगी।
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