द देवरिया न्यूज़/दुबई। दुबई एयरशो में इस समय दुनिया के सबसे उन्नत और खतरनाक स्टील्थ फाइटर जेट—अमेरिकी F-35 और रूसी Su-57—अपनी क्षमता का प्रदर्शन कर रहे हैं। इस शोकेस के जरिए अमेरिका और रूस दोनों की नजरें मध्य-पूर्व के उन देशों पर हैं जो तेजी से एडवांस हथियारों में निवेश बढ़ा रहे हैं।
हालांकि F-35 को दुनिया के लगभग 18 देश इस्तेमाल करते हैं और डोनाल्ड ट्रंप पहले ही सऊदी अरब को यह विमान बेचने की मंजूरी दे चुके हैं, वहीं रूस के Su-57 को अब तक अल्जीरिया के अलावा कोई बड़ा खरीदार नहीं मिला है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या रूस को अपने पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट के लिए नए ग्राहक मिल पाएंगे?
दुर्लभ मौका: एक ही मंच पर F-35 और Su-57E की उड़ान
सोमवार को लॉकहीड मार्टिन का F-35 और यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉरपोरेशन का Su-57E दुबई के अल-मकतूम इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसमान में उड़ान भरते दिखाई दिए—यह मौका अपने आप में दुर्लभ माना गया। F-35 ने लगभग आठ मिनट का दमदार प्रदर्शन किया, जबकि करीब डेढ़ घंटे बाद Su-57E ने अपनी क्षमताएं दिखाई।
मध्य-पूर्व में इस समय आधुनिक लड़ाकू विमानों को खरीदने की होड़ तेज हो गई है। इजरायल के साथ तनाव को देखते हुए ईरान भी एडवांस फाइटर जेट खरीदने की कोशिशें बढ़ा रहा है। इससे अमेरिकी और रूसी विमानों के बीच प्रतिस्पर्धा और दिलचस्प हो गई है।
इस्लामिक देशों में आधुनिक लड़ाकू विमानों की रेस तेज
संयुक्त अरब अमीरात पहले F-35 खरीदने की दिशा में आगे बढ़ रहा था, लेकिन 2021 में यह बातचीत अचानक रुक गई। इसकी वजह यूएई में चीनी कंपनी हुवावेई की तकनीकी मौजूदगी को बताया गया। इसी दौरान रूस का Su-57E संभावित विकल्प के रूप में सामने आया, हालांकि इसका निर्यात अभी तक शुरू नहीं हुआ है।
इस बीच सऊदी अरब को F-35 बेचने को लेकर ट्रंप सरकार पहले ही मंजूरी दे चुकी है, लेकिन अमेरिकी कांग्रेस की स्वीकृति अभी बाकी है। इसलिए सऊदी के हाथों में F-35 आने में वर्षों लग सकते हैं। फिलहाल मध्य-पूर्व में इजरायल ही अकेला देश है जो F-35 संचालित करता है।
रूसी Su-57E की सबसे बड़ी पेशकश यह है कि इसे खरीदार देश में स्थानीय उत्पादन और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के साथ उपलब्ध कराया जा सकता है। यह प्रस्ताव रूस पहले भारत को भी दे चुका है। इस वजह से यूएई और सऊदी जैसे उभरते रक्षा-उत्पादन केंद्रों के लिए यह पेशकश आकर्षक मानी जा रही है।
लेकिन चुनौती यह है कि Su-57E की क्षमताओं, उसकी स्टेल्थ टेक्नोलॉजी और उसके ऑपरेशनल रिकॉर्ड को लेकर ठोस जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसके मुकाबले F-35 युद्ध में अपनी क्षमता साबित कर चुका है। हालांकि इसकी कीमत काफी अधिक—लगभग 100 मिलियन डॉलर प्रति यूनिट—होती है और अमेरिकी शर्तें भी कठोर होती हैं, जिससे इस्लामिक देशों के लिए खरीदना मुश्किल बन जाता है।
क्या ईरान Su-57 का नया ग्राहक बनेगा?
अक्टूबर में सामने आई एक लीक रिपोर्ट में दावा किया गया कि ईरान, रूस से Su-57 और Su-35 खरीदने के लिए बातचीत कर रहा है। एक हैकर समूह द्वारा जारी कथित दस्तावेजों में कहा गया कि ईरान लगभग 37 मिलियन डॉलर में Su-57 खरीदने पर चर्चा कर रहा है।
ऐसे में यह अटकलें तेज हैं कि क्या दुबई एयरशो के दौरान ईरान आधिकारिक तौर पर रूस के स्टील्थ जेट का नया ग्राहक बन सकता है।
Su-57 बनाम F-35: कौन बेहतर?
F-35 एक सिंगल-इंजन वाला अत्याधुनिक फाइटर जेट है, जिसमें रियल स्टेल্থ कैपेबिलिटी, सेंसर-फ्यूजन और नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर सिस्टम मौजूद हैं। इसका प्रूव्ड ऑपरेशनल रिकॉर्ड है। दूसरी ओर Su-57E ट्विन-इंजन प्लेटफॉर्म है, जो अधिक पेलोड क्षमता, बेहतरीन मैनेुवरेबिलिटी और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर जैसी सुविधाएं देता है, लेकिन इसकी स्टेल्थ क्वालिटी और कॉम्बैट डेटा पूरी तरह सार्वजनिक नहीं है।
यदि अरब देश F-35 चुनते हैं तो उन्हें अमेरिकी सुरक्षा ढांचे और आधुनिक इंटरऑपरेबिलिटी का बड़ा लाभ मिलेगा, लेकिन इसके साथ रणनीतिक निर्भरता भी बढ़ जाएगी। वहीं Su-57E अपेक्षाकृत सस्ता, लचीला और कम राजनीतिक प्रतिबंध वाला विकल्प है।
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