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यूएई–पाकिस्तान संबंधों में बढ़ी दूरी, भारत की ओर झुका अबू धाबी; राष्ट्रपति जरदारी अचानक यूएई दौरे पर

Published on: January 28, 2026
Distance increased in UAE-Pakistan relations

द देवरिया न्यूज़,इस्लामाबाद : संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और पाकिस्तान के रिश्तों में तल्खी बढ़ती नजर आ रही है। आर्थिक संकट से जूझ रहा पाकिस्तान लंबे समय से यूएई से कर्ज और मदद की उम्मीद करता रहा है, लेकिन हालिया घटनाक्रम में इस्लामाबाद ने सऊदी अरब के साथ अपनी नजदीकियां बढ़ा ली हैं। यमन और सूडान जैसे मुद्दों को लेकर यूएई और सऊदी अरब के बीच पहले से ही तनावपूर्ण संबंध हैं। ऐसे में पाकिस्तान के सऊदी खेमे में जाने के बाद यूएई ने भारत के साथ अपने संबंधों को और मजबूत करना शुरू कर दिया है।

इसी कड़ी में यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद (एमबीजेड) हाल ही में भारत दौरे पर आए थे, जहां दोनों देशों के बीच रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर हुए। इसके तुरंत बाद यूएई ने पाकिस्तान के साथ इस्लामाबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट से जुड़ी डील भी रद्द कर दी। इन घटनाओं से पाकिस्तान का नेतृत्व असहज नजर आ रहा है और इसी बीच राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी अचानक यूएई के दौरे पर पहुंच गए हैं।

चार दिवसीय यूएई दौरे पर जरदारी

पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी सोमवार को चार दिन के दौरे पर यूएई की राजधानी अबू धाबी पहुंचे। उनके स्वागत को लेकर भी पाकिस्तान में चर्चाएं हैं, क्योंकि यूएई की ओर से उनका स्वागत न्याय मंत्री ने किया। इस दौरे में जरदारी के साथ पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी भी मौजूद हैं।

बताया जा रहा है कि राष्ट्रपति जरदारी यूएई के शीर्ष नेतृत्व के साथ व्यापार, अर्थव्यवस्था, रक्षा और सुरक्षा सहयोग जैसे मुद्दों पर बातचीत करेंगे। पाकिस्तान की कोशिश है कि सुरक्षा सहयोग के नाम पर अरब देशों में अपनी भूमिका को और मजबूत किया जाए।

यूएई का भारत की ओर झुकाव

पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जरदारी की यात्रा के दौरान पश्चिम एशिया और दक्षिण एशिया के बदलते हालात पर भी चर्चा होगी। यूएई लंबे समय से पाकिस्तान को आर्थिक सहायता और तेल आपूर्ति के जरिए डिफॉल्ट से बचाता रहा है। हालांकि, पाकिस्तान के सऊदी अरब के करीब जाने के बाद यूएई ने भारत के साथ रणनीतिक रिश्तों को प्राथमिकता देना शुरू कर दिया है।

यूएई पाकिस्तान का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार रहा है। दुबई में बड़ी संख्या में पाकिस्तानी नागरिकों, सैन्य अधिकारियों और कारोबारियों ने निवेश कर रखा है। लगभग 15 लाख पाकिस्तानी यूएई में काम करते हैं और दशकों से पाकिस्तानी सेना यूएई के सैनिकों को प्रशिक्षण देती रही है। इसके बावजूद हालिया राजनीतिक और रणनीतिक बदलावों ने दोनों देशों के रिश्तों में खटास पैदा कर दी है।

इस्लामिक नाटो की योजना और बढ़ता तनाव

इस बीच पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच रक्षा समझौते के बाद यूएई की चिंताएं बढ़ी हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान सऊदी अरब और तुर्की के साथ मिलकर एक तरह का “इस्लामिक नाटो” बनाने की कोशिश कर रहा है। तुर्की और यूएई के बीच मुस्लिम ब्रदरहुड को लेकर पहले से मतभेद हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि इन्हीं कारणों से यूएई ने भारत के साथ अपने संबंधों को और मजबूत किया है। यूएई भारत से रक्षा उपकरण खरीदने की तैयारी में है और इसी संदर्भ में राष्ट्रपति एमबीजेड का भारत दौरा अहम माना जा रहा है।

इस्लामाबाद एयरपोर्ट डील से यूएई बाहर

यूएई ने पाकिस्तान को एक और बड़ा झटका देते हुए इस्लामाबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट से जुड़ी डील से खुद को अलग कर लिया है। इस समझौते को लेकर दोनों देशों के बीच अगस्त 2025 से बातचीत चल रही थी। पाकिस्तानी अखबार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, यूएई की अब इस परियोजना में कोई रुचि नहीं रह गई है।

कुल मिलाकर, पश्चिम एशिया में बदलते समीकरणों के बीच यूएई–पाकिस्तान संबंधों में आई यह दूरी और भारत के साथ बढ़ती नजदीकियां क्षेत्रीय राजनीति में एक अहम संकेत मानी जा रही हैं।

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