द देवरिया न्यूज़ : ‘रॉकी और रानी की प्रेम कहानी’ की प्रेस कॉन्फ्रेंस का वो खुशनुमा लम्हा आज भी लोगों की यादों में ताज़ा है। कैमरों की चमक, सितारों की भीड़ और बीच में खड़े धर्मेंद्र… उम्र 87, लेकिन दिल अब भी वही शरारती, वही दिलकश। जब उनसे शबाना आज़मी के साथ उनके किसिंग सीन पर सवाल पूछा गया था, तो पूरे हॉल में ठहाके गूंज उठे थे। मुस्कुराते हुए बोले थे—
“अरे, ये तो मेरे बाएं हाथ का खेल है… मौका मिलता है तो ऐसे छक्के लगा ही देता हूं।”
ये बात सुनकर हर कोई समझ गया था कि धरम पाजी सिर्फ फिल्मों में ही नहीं, असल जिंदगी में भी ज़िंदगी को दिल खोलकर जीने का नाम हैं।
लेकिन आज, 89 की उम्र में जब ये ‘ही-मैन’ दुनिया को अलविदा कह गया, तब एहसास हुआ कि उनकी चमक सिर्फ पर्दे तक सीमित नहीं थी। वह एक अद्भुत इंसान थे—एक शायर, एक बेइंतहा मोहब्बत करने वाले प्रेमी, एक स्नेहिल पिता और सबसे बढ़कर… यारों के यार।
सायरा बानो का दर्द—“दिलीप साहब के बाद जिसने मेरा हाथ थामा था, वो आज चला गया”
धर्मेंद्र को करीब से जानने वालों की जुबान पर एक ही बात है—
वो दिल के सच्चे थे, और जिंदादिली उनके व्यक्तित्व का सबसे खूबसूरत हिस्सा थी।
सायरा बानो जब धर्मेंद्र के जाने की खबर सुनती हैं तो रो पड़ती हैं। गला रुंध जाता है। कहती हैं—
“यकीन नहीं होता… वो ठीक हो रहे थे। वेंटिलेटर से हटने वाले थे।”
सायरा बानो और धर्मेंद्र का रिश्ता सिर्फ को-स्टार्स का नहीं था।
‘आई मिलन की बेला’, ‘आदमी और इंसान’, ‘ज्वार भाटा’—इन फिल्मों ने उन्हें करीब लाया।
सायरा बताती हैं—
“वो दिलीप साहब के भाई जैसे थे… मेरे अपने परिवार जैसे। चाहे जब घर आ जाते थे, घंटों बातें होतीं, शायरी होती, हंसी-मजाक चलता।”
दिलीप कुमार के निधन के बाद सायरा टूट गई थीं।
तब धरम जी ने उनका हाथ थामा।
सायरा कहती हैं—
“मैं बहुत अकेली हो गई थी… तब धरम जी ने सच में मेरा साथ दिया। उनकी मौजूदगी मुझे संभालती थी।”
दोस्ती… जिसके लिए 8 फिल्मों की फीस भी ठुकरा दी
धर्मेंद्र सिर्फ बड़े स्टार नहीं थे—वे बड़े दिल वाले इंसान थे।
जिस निर्देशक अर्जुन हिंगोरानी ने उन्हें बॉलीवुड में ब्रेक दिया था, धरम ने उनका कर्ज कभी नहीं भुलाया।
अनीता राज बताती हैं—
“मेरे चाचा अर्जुन हिंगोरानी ने धरम जी को ब्रेक दिया था। और आगे चलकर धरम जी ने उनके साथ 7–8 फिल्में कीं… लेकिन एक भी फिल्म की फीस नहीं ली।”
जब भी हिंगोरानी उनसे पैसों की बात करते, धर्मेंद्र हंसकर कहते—
“अरे अर्जुन, तुमसे पैसे लूंगा मैं? इंडस्ट्री का दरवाज़ा मेरे लिए तुमने खोला था।”
आज के समय में ऐसा कौन करता है?
हुकूमत की शूटिंग रुकी तो जेब से दिए ₹2.5 लाख
फिल्मकार अनिल शर्मा की आंखें नम हो जाती हैं जब वे एक पुरानी घटना बताते हैं।
1987 में ‘हुकूमत’ की शूटिंग चल रही थी। सेट पर 400 लोग थे।
अचानक फाइनेंसर ने पैसे भेजने बंद कर दिए। शूटिंग रुकने की नौबत आ गई।
अनिल शर्मा बताते हैं—
“मैं बहुत परेशान था। जब धरम जी को पता चला तो उन्होंने अपनी जेब से ढाई लाख रुपये दिए और कहा—‘शूटिंग रुकनी नहीं चाहिए। अच्छी फिल्म बनाओ।’”
ये वही ‘हुकूमत’ थी जिसने अनिल शर्मा के करियर को नई दिशा दी।
लाइटमैन के पैरों में छाले देख कर दिल पसीज गया
धरम जी का दिल सिर्फ बड़े लोगों के लिए नहीं धड़कता था।
अनीता राज एक और किस्सा सुनाती हैं—
जयपुर में एक फिल्म की शूटिंग थी। भीषण गर्मी। कलाकारों के लिए बड़ी छतरियां थीं, लेकिन लाइटमैन खुले सूरज में काम कर रहा था। गर्मी से उसके पैरों में छाले पड़ गए थे।
धर्मेंद्र ने देखा तो तुरंत उसे अपने पास बुलाया, छतरी के नीचे बैठाया और फिर पूरी यूनिट के लिए छतरियों का इंतजाम करवाया।
कहते हैं—
“धरम जी की सखावत की मिसाल नहीं मिल सकती।”
एक थप्पड़… और दोनों की आंखों में आंसू
नील नितिन मुकेश को आज भी वो दिन याद है जब ‘जॉनी गद्दार’ की शूटिंग में धरम जी का असली थप्पड़ लग गया था।
नील कहते हैं—
“मुझे दर्द से आंसू आ गए… लेकिन जब उन्होंने देखा तो खुद भी रो पड़े। बोले—‘बेटा, चोट तुम्हें नहीं, मुझे लगी है।’”
और यही थे धरम पाजी—शरीर से ही-मैन, दिल से रुई जैसे नरम।
आज आसमान थोड़ा खाली लग रहा है…
धर्मेंद्र का जाना सिर्फ बॉलीवुड का नुकसान नहीं है, बल्कि उन लाखों लोगों का दर्द भी है जिनके दिलों को उन्होंने अपनी मुस्कान, अपनी जिंदादिली और अपने प्यार से छुआ।
उनके दोस्त, उनके चाहने वाले, उनकी फिल्में, उनकी शायरी—
सब यही कह रही है—
“धरम पाजी जैसे लोग इस दुनिया में कम ही आते हैं…
और जब जाते हैं, तो अपने पीछे मोहब्बत की एक पूरी विरासत छोड़ जाते हैं।”
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