द देवरिया न्यूज़ ,देवरिया। देवरिया में मेडिकल कॉलेज के पानी की टंकी में मिले शव मामले में पुलिस जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। महाराष्ट्र के ठाणे जिले के रहने वाले 61 वर्षीय अशोक गांडे की मौत को लेकर पुलिस को कई ऐसे साक्ष्य मिले हैं जो हत्या की ओर इशारा कर रहे हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से यह स्पष्ट हुआ है कि अशोक की मौत पानी की टंकी में डाले जाने से पहले ही हो चुकी थी, क्योंकि फेफड़ों में पानी नहीं पाया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, शरीर पर कई जगह चोट के निशान भी मिले हैं, जो इस बात की पुष्टि करते हैं कि घटना के पीछे कोई आपराधिक साजिश हो सकती है।
ओपीडी बिल्डिंग पर टिके शक के साये
सूत्रों के अनुसार, पुलिस की जांच अब मेडिकल कॉलेज की ओपीडी बिल्डिंग पर केंद्रित है। माना जा रहा है कि अशोक की हत्या का ब्लूप्रिंट यहीं तैयार हुआ था। पुलिस ने कुछ स्वास्थ्यकर्मियों को संदिग्ध मानते हुए उनकी निगरानी शुरू कर दी है। जांच में यह भी सामने आया है कि अशोक सर्जिकल वार्ड में भर्ती थे, जहां उनके पैर के घाव का इलाज चल रहा था। बावजूद इसके, उनकी पत्नी तनु और साले प्रफुल्ल का कहना है कि अशोक की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी।
हालांकि, पुलिस को मिले बीएचटी (बेड हेड टिकट) रिकॉर्ड से यह साफ हुआ है कि अशोक को मानसिक रोग की कोई दवा नहीं दी जा रही थी। यही नहीं, सर्जिकल वार्ड से वह दो बार 24 घंटे के अंदर गायब भी हुए, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने इसकी सूचना पुलिस को नहीं दी। यह लापरवाही अब जांच के घेरे में है।
संदिग्ध स्वास्थ्यकर्मियों पर नजर
जांच में शामिल टीम ने बताया कि तीन स्वास्थ्यकर्मी प्रारंभिक पूछताछ में संदिग्ध पाए गए हैं। फिलहाल पुलिस उन पर कड़ी निगरानी रख रही है। महाराष्ट्र जाकर लौटे पुलिस दल ने वहां से मिले तथ्यों को भी जांच में शामिल किया है। इस केस से जुड़े कई दस्तावेज, कॉल डिटेल्स और अस्पताल रिकॉर्ड को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है।
फोन नंबर और कॉल डिटेल्स से खुल सकते हैं राज
पुलिस को भर्ती रजिस्टर में अशोक के नाम के साथ एक मोबाइल नंबर मिला है — 886882**, जो इस समय बंद है। वहीं, 108 एंबुलेंस को कॉल करने वाले पुरवां निवासी सुदर्शन यादव ने बताया कि उन्हें चौरा चौरी में सड़क किनारे अशोक मिले थे। उन्होंने सुदर्शन को दो मोबाइल नंबर दिए और किसी से बात कराने की बात कही थी, लेकिन एक नंबर बंद था और दूसरे पर किसी ने कॉल रिसीव नहीं की। सुदर्शन ने बताया कि अशोक ने व्हाट्सएप या इंस्टाग्राम के माध्यम से संपर्क करने की बात भी कही थी।
सीओ सिटी संजय रेड्डी ने बताया कि पुलिस सोमवार को अशोक के परिजनों के बयान दर्ज करेगी। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने मरीज के गायब होने की कोई जानकारी पुलिस को नहीं दी थी, जबकि यह अनिवार्य था।
छह अक्टूबर को मिला था शव
अशोक गांडे का शव छह अक्टूबर की सुबह मेडिकल कॉलेज की पानी की टंकी में मिला था। पुलिस ने मौके से नीले रंग की शर्ट और मेडिकल कॉलेज की एक चादर भी बरामद की थी। तीन दिन की खोजबीन के बाद शव की पहचान अशोक के रूप में हुई। इसके बाद पुलिस ने ठाणे स्थित उनके घर और गोरखपुर के ससुराल के बीच की कड़ियों को जोड़ने की कोशिश शुरू की।
पुलिस का मानना है कि अशोक की हत्या कहीं और की गई और शव को पानी की टंकी में डालकर सबूत मिटाने की कोशिश की गई। यह भी आशंका है कि हत्या में किसी अंदरूनी व्यक्ति की भूमिका हो सकती है, जिसे अस्पताल के कामकाज की पूरी जानकारी थी।
ससुराल में शांतिपाठ, सोमवार को बयान
अशोक की मौत की पुष्टि के बाद उनकी पत्नी तनु और साले प्रफुल्ल नागरकर ने गोरखपुर स्थित दुर्गाबाड़ी रोड हुमायूंपुर दक्षिणी स्थित आवास पर रविवार को शांतिपाठ और पूजन कराया। सोमवार को दोनों देवरिया कोतवाली पहुंचकर अपने बयान दर्ज कराएंगे।
प्रफुल्ल ने बताया कि देवरिया पुलिस ने शनिवार को ही संपर्क किया था, लेकिन धार्मिक कर्मकांडों के कारण उन्होंने सोमवार को बयान देने की बात कही थी। उन्होंने यह भी कहा कि परिवार न्याय की उम्मीद कर रहा है और चाहता है कि अशोक की मौत की असली वजह सामने आए।
जांच अब अंतिम चरण में
पुलिस का कहना है कि अब तक मिले साक्ष्य हत्या की पुष्टि की दिशा में इशारा कर रहे हैं। कई अहम सुराग मिलने के बाद अब कातिलों की गिरफ्तारी दूर नहीं मानी जा रही है। सीओ सिटी ने बताया कि “मामले में कई बिंदुओं पर जांच जारी है, मेडिकल कॉलेज के कुछ कर्मचारियों से विस्तृत पूछताछ की जा रही है। बहुत जल्द पूरा सच सामने होगा।”
इस सनसनीखेज मामले ने न केवल मेडिकल कॉलेज प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि अस्पताल में सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था की भी पोल खोल दी है। पुलिस अब इस गुत्थी को पूरी तरह सुलझाने के लिए सभी पहलुओं पर तेजी से काम कर रही है।
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