हारे व जीते प्रत्याशियों से ली गई विस्तृत रिपोर्ट
बुधवार को शुरू हुई समीक्षा का पहला चरण मगध प्रमंडल के हारे और जीते उम्मीदवारों के साथ बैठक से आरंभ हुआ। सुबह 11 बजे शुरू हुई यह बैठक दोपहर 3 बजे तक चली। इसमें प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल, अब्दुल बारी सिद्दिकी और भोला यादव सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। बैठक में प्रत्याशियों ने अपने विधानसभा क्षेत्र का पूरा विवरण लिखित रूप में नेतृत्व को सौंपा। उम्मीदवारों ने उन स्थानीय नेताओं के नाम बताए, जिन्होंने चुनाव के दौरान पार्टी और महागठबंधन उम्मीदवारों को हराने में भूमिका निभाई। कई नेताओं पर विपक्ष के साथ मिलकर काम करने का आरोप भी लगा है।
प्रत्याशियों का कहना है कि इस अंदरूनी विरोध के चलते महागठबंधन को नुकसान उठाना पड़ा और कई सीटें हाथ से निकल गईं। यही वजह है कि RJD अब किसी भी स्तर पर संगठनात्मक कमजोरी को दूर करने की रणनीति पर काम शुरू कर चुकी है।
दो चरणों में पूरा होगा ‘सफाई अभियान’
पार्टी सूत्रों के अनुसार समीक्षा प्रक्रिया दो चरणों में संचालित की जाएगी। पहले चरण में 4 दिसंबर तक प्रमंडलवार बैठकें चलेंगी, जिनमें सभी क्षेत्रों के प्रत्याशी अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों की रिपोर्ट देंगे। इसके बाद दूसरे चरण में 5 से 9 दिसंबर तक जिलाध्यक्षों, प्रधान महासचिवों और प्रदेश स्तरीय पदाधिकारियों के साथ बैठकें होंगी।
इन दूसरी चरण की बैठकों का मकसद यह है कि प्रत्याशियों द्वारा बताए गए नामों पर जिलों व संगठन के पदाधिकारियों से राय ली जाए। जिन लोगों के खिलाफ गंभीर आरोप सामने आएंगे, उनसे पार्टी सफाई मांगेगी। यदि उनका जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया, तो ऐसे नेताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की संभावना है। पार्टी स्तर पर संकेत दिए गए हैं कि दोषी पाए जाने वालों पर निष्कासन तक की कार्रवाई से पीछे नहीं हटा जाएगा।
अगले दो दिनों की बैठक का एजेंडा तय
RJD ने अगले दो दिनों की समीक्षा का एजेंडा भी तय कर लिया है। गुरुवार को सारण प्रमंडल के प्रत्याशियों के साथ बैठक प्रस्तावित है। शुक्रवार को पूर्णिया प्रमंडल के उम्मीदवारों से लिखित और मौखिक रिपोर्ट ली जाएगी। इन बैठकों में न केवल हार-जीत की समीक्षा की जाएगी, बल्कि संगठन को मजबूत करने, जनता से जुड़े मुद्दों को उठाने और भविष्य की रणनीति को नए सिरे से तैयार करने के सुझाव भी लिए जा रहे हैं। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि जनादेश पाने के लिए जमीनी स्तर पर मजबूत पकड़, संगठन में अनुशासन और स्पष्ट राजनीतिक रणनीति बेहद जरूरी है।
RJD इस चुनावी हार को एक बड़े सबक के रूप में देख रही है और आने वाले महीनों में व्यापक संगठनात्मक बदलाव तथा अनुशासनात्मक कार्रवाई की तैयारी कर चुकी है। पार्टी का मानना है कि यदि समय रहते अंदरूनी कमजोरियों को दूर नहीं किया गया, तो भविष्य में भी चुनावी नुकसान की संभावना बनी रहेगी।