नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को एक बड़े फैसले के तहत देश को दाल उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए ₹11,440 करोड़ के विशेष मिशन को मंज़ूरी दी। इस योजना का नाम “मिशन फॉर आत्मनिर्भरता इन पल्सेज़” रखा गया है और यह वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक लागू रहेगा।
दालों में आत्मनिर्भरता का लक्ष्य
केंद्र सरकार का कहना है कि इस मिशन का मुख्य उद्देश्य भारत को दालों के मामले में आत्मनिर्भर बनाना है। वर्तमान में देश को अपनी ज़रूरतें पूरी करने के लिए दालों का आयात करना पड़ता है। मिशन के तहत खेती योग्य क्षेत्र में विस्तार, बेहतर बीजों का प्रयोग, आधुनिक कृषि तकनीकों का इस्तेमाल और किसानों को प्रोत्साहन देकर घरेलू उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा।
किसानों को लाभ
सरकार का मानना है कि इस मिशन से किसानों की आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी। दालों की पैदावार बढ़ने से आयात पर निर्भरता कम होगी और किसानों को फसल का बेहतर मूल्य भी मिलेगा। साथ ही, सरकार किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीज, उन्नत किस्मों के पौधे और प्रशिक्षण उपलब्ध कराएगी।
पोषण और खाद्य सुरक्षा पर असर
विशेषज्ञों का कहना है कि दालें प्रोटीन का सबसे बड़ा स्रोत हैं और इनका पर्याप्त उत्पादन देश की पोषण सुरक्षा और खाद्य सुरक्षा के लिए ज़रूरी है। आत्मनिर्भरता हासिल होने से न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था मज़बूत होगी बल्कि देशवासियों को सस्ती और पोषणयुक्त दालें भी उपलब्ध हो सकेंगी।
सरकार की रणनीति
सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस मिशन को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। इसमें अनुसंधान और विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा ताकि दाल की नई किस्में विकसित की जा सकें। साथ ही, किसानों को भंडारण और विपणन की बेहतर सुविधाएँ भी दी जाएंगी ताकि उनकी मेहनत का उचित लाभ उन्हें मिल सके।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम
केंद्रीय मंत्री मंडल ने कहा कि यह योजना न केवल दाल उत्पादन बढ़ाने का प्रयास है, बल्कि यह “आत्मनिर्भर भारत” की दिशा में एक बड़ा कदम है। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में भारत दालों के उत्पादन में पूरी तरह आत्मनिर्भर बन जाए और वैश्विक स्तर पर भी अपनी पहचान बनाए।
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