द देवरिया न्यूज़,इस्लामाबाद : अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान ने खुद को एक संभावित मध्यस्थ के रूप में पेश किया है। इस पहल को पाकिस्तान के लिए बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, इस कोशिश को लेकर कई तरह के सवाल भी उठ रहे हैं और इसके पीछे की मंशा पर संदेह जताया जा रहा है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर से बातचीत की है, जबकि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के तेहरान जाकर ईरानी प्रतिनिधियों से मिलने की संभावना भी जताई जा रही है। दूसरी ओर, कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि पाकिस्तान की इस पहल के पीछे कोई रणनीतिक उद्देश्य भी हो सकता है, जिसे लेकर ईरान सतर्क नजर आ रहा है।
इस्लामाबाद में हो सकती है बातचीत
सूत्रों के मुताबिक, यदि ईरान सहमति देता है तो अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता इस्लामाबाद में आयोजित हो सकती है। संभावित तौर पर यह बैठक शुक्रवार या शनिवार को हो सकती है। पश्चिम एशिया में मौजूदा तनाव के बीच यह बातचीत एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक प्रयास माना जा रहा है।
इस पहल की शुरुआत 12 मार्च को जेद्दा में हुई एक बैठक से मानी जा रही है, जहां पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ असीम मुनीर ने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के सामने मध्यस्थता का प्रस्ताव रखा था। इसके बाद सऊदी अरब ने अमेरिका से संपर्क किया और इस पहल को आगे बढ़ाने की सहमति बनी।
मध्यस्थता समूह का गठन
बताया जा रहा है कि 18 मार्च को रियाद में अरब और इस्लामी देशों की बैठक में पाकिस्तान, तुर्की, मिस्र और ओमान को शामिल करते हुए एक मध्यस्थता समूह बनाया गया। इसके बाद पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व ने विभिन्न पक्षों से कई दौर की बातचीत की।
ईरान की प्रतिक्रिया पर टिकी उम्मीदें
अमेरिकी पक्ष की सैद्धांतिक सहमति के बाद ईरान से संपर्क किया गया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से बातचीत कर प्रस्ताव की जानकारी दी है। हालांकि, ईरान ने अभी तक औपचारिक जवाब नहीं दिया है और इस पर आंतरिक स्तर पर विचार-विमर्श कर रहा है।
सूत्रों के अनुसार, बातचीत के लिए इस्लामाबाद के अलावा इस्तांबुल, काहिरा या शर्म अल-शेख जैसे स्थानों पर भी विचार किया जा रहा है। इसके बावजूद पाकिस्तान पहले दौर की वार्ता की मेजबानी करने के लिए उत्सुक दिखाई दे रहा है।
एजेंडे में कई अहम मुद्दे
संभावित वार्ता में होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने, ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों पर नियंत्रण, और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।
पाकिस्तान का आधिकारिक रुख
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि यदि दोनों पक्ष तैयार हों तो वह बातचीत की मेजबानी के लिए तैयार है। प्रवक्ता ताहिर हसन अंद्राबी ने क्षेत्र में स्थिरता के लिए कूटनीति को जरूरी बताते हुए कहा कि इस्लामाबाद हर संभव सहयोग के लिए तैयार है।
फिलहाल इस पहल का भविष्य पूरी तरह ईरान के रुख पर निर्भर है। यदि तेहरान सहमत होता है, तो यह मौजूदा संकट के बीच एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहल साबित हो सकती है, हालांकि जमीनी स्तर पर तनाव अभी भी बरकरार है।
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