द देवरिया न्यूज़,लखनऊ: उत्तर प्रदेश में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आरोप लगाया है कि भाजपा एसआईआर के जरिए विपक्ष समर्थक वोटरों के नाम मतदाता सूची से कटवाने की साज़िश कर रही है।
नई दिल्ली में शीतकालीन सत्र से पहले मीडिया से बात करते हुए अखिलेश यादव ने दावा किया कि एसआईआर की प्रक्रिया जानबूझकर शादी-विवाह के व्यस्त मौसम में रखी गई है। उन्होंने कहा कि शादियों में लोग एक-दूसरे की मदद करने गांव-गांव जाते हैं, ऐसे में कई लोग अपने घरों पर मौजूद नहीं होते और उसी बहाने उनके नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे हैं।
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि बीएलओ को ठीक से प्रशिक्षण नहीं दिया गया है। कई जगह फॉर्म भरने और अपलोड करने में बीएलओ को कठिनाइयाँ हो रही हैं, जिसके कारण पूरा परिवार फॉर्म भरने में लगा है। उन्होंने कहा कि “बेंगलुरु में नौकरी करने वाला एक युवक सिर्फ अपनी मां की मदद के लिए नौकरी छोड़कर एसआईआर फॉर्म भरवा रहा है।”
सपा अध्यक्ष ने सवाल उठाया कि चुनाव आयोग का दायित्व है कि किसी मतदाता का नाम न छूटे, लेकिन सरकार ने ऐसी तारीखें चुनी हैं जिनमें सबसे अधिक विवाह और कार्यक्रम होते हैं। “यदि किसी पंडित से पूछ लें तो वे भी बताएंगे कि शादियों का सबसे व्यस्त समय यही है,” उन्होंने कहा।
अखिलेश ने एसआईआर ड्यूटी में लगे कई बीएलओ की मौतों का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारियों पर फॉर्म बांटने और भरवाने का इतना दबाव है कि यह उनकी जान पर बन गया है। “एक बीएलओ के परिवार ने आरोप लगाया है कि उससे वोट कम करने का दबाव बनाया जा रहा था,” उन्होंने कहा।
अखिलेश के अनुसार, एसआईआर की जल्दबाजी का कोई औचित्य नहीं है, क्योंकि यूपी में फिलहाल कोई चुनाव घोषित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग “बीजेपी का सपना पूरा करना चाहता है” ताकि विपक्षी दलों के वोट काटे जा सकें।
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