अपने संबोधन में जिलाधिकारी दिव्या मित्तल ने कहा कि टीबी एक गंभीर बीमारी जरूर है, लेकिन यह पूरी तरह इलाज योग्य है। उन्होंने जोर देकर कहा कि समय पर जांच और पूरा उपचार कराने से इस बीमारी को जड़ से समाप्त किया जा सकता है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय ग्राम स्तर पर जागरूकता, सतर्कता और जनसहभागिता को दिया।
जनभागीदारी से मिली सफलता
डीएम ने कहा कि टीबी उन्मूलन के लिए सरकार के प्रयासों के साथ-साथ आम लोगों की भागीदारी बेहद जरूरी है। उन्होंने सभी ग्राम प्रधानों और स्वास्थ्य विभाग की टीम को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी और भविष्य में भी इसी तरह सक्रिय रहकर जिले को पूरी तरह टीबी मुक्त बनाने का आह्वान किया।
इन ब्लॉकों की ग्राम पंचायतें हुईं सम्मानित
सम्मानित ग्राम पंचायतों में भागलपुर ब्लॉक की 21, सलेमपुर की 17, पथरदेवा और तरकुलवा की 15-15, गौरी बाजार की 14 और रुद्रपुर की 12 ग्राम पंचायतें शामिल हैं। इसके अलावा बनकटा, बैतालपुर, भलवानी, लार, देसई देवरिया और भाटपार रानी की 10-10 ग्राम पंचायतों को भी टीबी मुक्त घोषित किया गया। इसके साथ ही बरहज ब्लॉक की 10, रामपुर कारखाना की 8 और भटनी की 8 ग्राम पंचायतों को भी इस सूची में शामिल किया गया।
अधिकारियों और चिकित्सकों की रही मौजूदगी
कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा अतिथियों के स्वागत से हुई। इस दौरान जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. राजेश कुमार, डॉ. संजय कुमार गुप्ता, डॉ. आर.पी. यादव, डॉ. अजय शाही और डॉ. राजीव रंजन सहित कई चिकित्सक एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन चंद्रप्रकाश त्रिपाठी ने किया। इस मौके पर मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉ. एच.के. मिश्रा, प्राचार्य डॉ. रजनी पटेल, डॉ. नितीश राय, डॉ. जफर अनीश समेत बड़ी संख्या में अधिकारी, कर्मचारी और ग्राम प्रधान मौजूद रहे। इस आयोजन के माध्यम से टीबी उन्मूलन को लेकर जागरूकता बढ़ाने और सामूहिक प्रयासों को और मजबूत करने का संदेश दिया गया।