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संचार साथी ऐप पर सियासी विवाद के बीच सरकार का बयान—अब फोन में अनिवार्य प्री-इंस्टॉलेशन नहीं

Published on: December 4, 2025
political on sanchar sathi app

द देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली: संचार साथी ऐप को लेकर चल रहे सियासी घमासान और भ्रम के बीच बुधवार को सरकार ने स्पष्ट किया कि अब मोबाइल फोन में संचार साथी ऐप को पहले से इंस्टॉल करना अनिवार्य नहीं है। यह निर्णय संसद में ऐप की गोपनीयता और डेटा सुरक्षा से जुड़े सवालों पर जारी बहस के बीच लिया गया है।

पिछले सप्ताह जारी एक आदेश में मोबाइल फोन निर्माताओं के लिए स्मार्टफोन में संचार साथी ऐप को प्री-इंस्टॉल करना अनिवार्य किया गया था। वहीं, सरकार ने अब कहा है कि यह ऐप पूरी तरह से उपयोगकर्ताओं को साइबर धोखाधड़ी से बचाने, संदिग्ध गतिविधियों की रिपोर्ट करने और साइबर अपराध से निपटने में सहायता के लिए डिज़ाइन किया गया है।

सरकारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, अब तक 1.4 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता इस ऐप को डाउनलोड कर चुके हैं, जो प्रतिदिन करीब 2,000 साइबर धोखाधड़ी मामलों की जानकारी भेजते हैं। पिछले 24 घंटों में ही 6 लाख नए रजिस्ट्रेशन हुए हैं। सरकार का कहना है कि ऐप की बढ़ती स्वीकार्यता को देखते हुए प्री-इंस्टॉलेशन को अनिवार्य नहीं रखने का निर्णय लिया गया है।

लोकसभा में केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि संचार साथी ऐप में स्नूपिंग की कोई संभावना नहीं है, और भविष्य में भी यह संभव नहीं होगा। उन्होंने कहा कि देश में मोबाइल उपयोगकर्ताओं की संख्या अब 1 अरब तक पहुंच चुकी है, ऐसे में दूरसंचार सेवाओं के बढ़ते दुरुपयोग से लोगों को सुरक्षित रखना सरकार का दायित्व है। इसी उद्देश्य से 2023 में संचार साथी पोर्टल और 2025 में संचार साथी ऐप शुरू किया गया था।

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