इस रैली में विद्यालय के छात्र-छात्राओं, स्वास्थ्य विभाग के कर्मियों और अधिकारियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। आकर्षण का केंद्र टीबी के बैक्टीरिया और ‘टीबी चैंपियन’ के प्रतीकात्मक पुतले रहे, जिनके माध्यम से लोगों को बीमारी के प्रति जागरूक किया गया। “जन-जन का हो एक ही नारा, टीबी मुक्त हो देश हमारा” जैसे नारों के साथ रैली शहर के प्रमुख मार्गों—कोतवाली रोड, जिलाधिकारी आवास, सिविल लाइन, बस स्टैंड और सीएमओ कार्यालय—से होते हुए टीबी क्लिनिक पर जाकर संपन्न हुई।
इस अवसर पर जिलाधिकारी दिव्या मित्तल ने कहा कि टीबी उन्मूलन केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए जनभागीदारी बेहद आवश्यक है। उन्होंने बताया कि जिले को टीबी मुक्त बनाने के लिए प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग मिलकर लगातार काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले कुछ समय में टीबी से होने वाली मृत्यु दर में कमी आई है, जो एक सकारात्मक संकेत है। जिलाधिकारी ने आम जनता से अपील की कि यदि किसी व्यक्ति में टीबी के लक्षण दिखाई दें, तो वह तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर जांच कराए और इलाज शुरू करे।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अनिल कुमार गुप्ता ने जानकारी दी कि सरकार टीबी उन्मूलन के लिए आधुनिक तकनीकों और संसाधनों का उपयोग कर रही है। जिले में टीबी मरीजों की सक्रिय खोज अभियान चलाया जा रहा है, ताकि समय रहते मरीजों की पहचान कर उनका इलाज सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने बताया कि 24 मार्च को विश्व टीबी दिवस के मौके पर जिले की 192 ग्राम पंचायतों को ‘टीबी मुक्त’ घोषित किए जाने पर उनके प्रधानों को सम्मानित किया जाएगा।
इसके साथ ही आयुष्मान आरोग्य मंदिरों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर विशेष स्वास्थ्य शिविर और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को टीबी के लक्षण, बचाव और उपचार के बारे में विस्तृत जानकारी दी जाएगी।
कार्यक्रम में जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. राजेश कुमार, डिप्टी सीएमओ डॉ. अश्वनी पांडेय, डॉ. विपिन रंजन, प्रधानाचार्य राम किंकर मिश्रा सहित कई अन्य अधिकारी, स्वास्थ्यकर्मी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, टीबी एक संक्रामक बीमारी है, जिसके प्रमुख लक्षणों में लगातार दो सप्ताह से अधिक समय तक खांसी, खांसी में खून आना, सीने में दर्द, वजन कम होना, बुखार, रात में पसीना आना और लगातार थकान शामिल हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत जांच कराना बेहद जरूरी है, ताकि समय रहते इलाज शुरू किया जा सके और बीमारी को फैलने से रोका जा सके।