पुराने नियमों से बाहर किए गए लोगों को राहत
बिल C-3 के लागू होने से पहले फर्स्ट जेनरेशन लिमिट के चलते कई ऐसे लोग नागरिकता से वंचित रह गए थे, जिनके माता-पिता कनाडाई नागरिक तो थे, लेकिन उनका जन्म कनाडा के बाहर हुआ था। नया कानून ऐसे सभी योग्य लोगों को स्वतः कनाडाई नागरिक के रूप में मान्यता देता है और उन्हें नागरिकता के प्रमाण के लिए आवेदन करने का अधिकार भी देता है।
नए नियमों में क्या बदला
नए प्रावधानों के अनुसार, विदेश में पैदा हुए या गोद लिए गए कनाडाई माता-पिता अब अपने बच्चों को, जो कनाडा के बाहर जन्मे या गोद लिए गए हों, नागरिकता दे सकेंगे। हालांकि इसके लिए एक शर्त रखी गई है।
माता-पिता को बच्चे के जन्म या गोद लेने से पहले कम से कम तीन साल (1095 दिन) तक कनाडा में शारीरिक रूप से मौजूद रहना अनिवार्य होगा।
वंश के आधार पर नागरिकता का दायरा बढ़ा
यह कानून वंश के आधार पर नागरिकता देने के मामले में कनाडा के नजरिए को ज्यादा उदार और आधुनिक बनाता है। अब विदेश में पैदा हुई पहली पीढ़ी से आगे भी नागरिकता की पात्रता का विस्तार किया गया है। इस बिल को 2025 की शुरुआत में इमिग्रेशन, रिफ्यूजी और सिटिजनशिप कनाडा (IRCC) के मंत्री ने संसद में पेश किया था।
बिल C-3 क्यों था जरूरी
दरअसल, 2009 में लागू की गई फर्स्ट जेनरेशन लिमिट को लेकर लंबे समय से कानूनी और राजनीतिक विवाद चल रहा था। इस नियम के तहत उन कनाडाई नागरिकों के बच्चों को नागरिकता नहीं मिल पाती थी, जो खुद भी कनाडा के बाहर पैदा हुए थे या गोद लिए गए थे।
दिसंबर 2023 में ओंटारियो सुपीरियर कोर्ट ऑफ जस्टिस ने इस लिमिट के मुख्य हिस्सों को असंवैधानिक करार दिया था। इसके बाद संघीय सरकार ने इस फैसले के खिलाफ अपील न करने का निर्णय लिया और माना कि पुराना कानून विदेश में रहने वाले कनाडाई नागरिकों के बच्चों के साथ अन्याय कर रहा था।
भारतवंशी समुदाय को बड़ा फायदा
कनाडा में बड़ी संख्या में भारत से गए लोग रहते हैं। ऐसे में यह बदलाव उन हजारों भारतवंशी परिवारों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है, जो लंबे समय से अपने बच्चों की कनाडाई नागरिकता का इंतजार कर रहे थे।