Breaking News
ट्रेंडिंग न्यूज़देवरिया न्यूज़उत्तर प्रदेश न्यूज़राष्ट्रीय न्यूज़अंतर्राष्ट्रीय न्यूज़राजनीतिक न्यूज़अपराधिक न्यूज़स्पोर्ट्स न्यूज़एंटरटेनमेंट न्यूज़बिज़नस न्यूज़टेक्नोलॉजी अपडेट लेटेस्ट गैजेट अपडेटमौसम

दिल्ली की जेलों में चौंकाने वाला आंकड़ा: आधे से ज्यादा कैदी 30 साल से कम उम्र के युवा

Published on: February 5, 2026
Shocking in Delhi jails
द देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली की जेलों से जुड़ा एक चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है, जो समाज और व्यवस्था दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय है। जिस उम्र में युवा शिक्षा, रोजगार और भविष्य निर्माण की दिशा में कदम बढ़ाते हैं, उसी उम्र में हजारों युवक दिल्ली की जेलों में बंद हैं। राजधानी की 16 जेलों में कुल 18,969 कैदियों में से 9,434 कैदी, यानी करीब 50 प्रतिशत, 21 से 30 वर्ष की आयु वर्ग के हैं।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, दूसरा सबसे बड़ा आयु वर्ग 31 से 50 वर्ष का है, जिसमें 7,222 कैदी शामिल हैं। वहीं 18 से 20 वर्ष की आयु के 1,104 युवा भी जेलों में बंद हैं। कुल मिलाकर देखा जाए तो जेल में बंद कैदियों में 55 प्रतिशत से अधिक 30 वर्ष से कम उम्र के हैं, जबकि हर 10 में से 7 कैदी 50 वर्ष से कम आयु के हैं। इसके उलट 65 वर्ष या उससे अधिक उम्र के कैदियों की संख्या महज 167 है।

विचाराधीन कैदियों की संख्या सबसे ज्यादा

दिल्ली की जेलों में बंद कैदियों में से 16,512 कैदी यानी करीब 87 प्रतिशत विचाराधीन हैं, जो अदालतों में अपने मामलों के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। केवल एक छोटा हिस्सा ही सजा पाए दोषियों का है। यह आंकड़ा न्यायिक प्रक्रिया में हो रही देरी की ओर भी इशारा करता है।

कैदियों की नागरिकता की बात करें तो कुल कैदियों में से 18,248 यानी 96 प्रतिशत से अधिक भारतीय नागरिक हैं। शेष विदेशी नागरिक हैं, जिनमें से कई नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों में जेल में बंद हैं। जेलों में पुरुष कैदियों का दबदबा है, जहां 98 प्रतिशत से अधिक पुरुष बंदी हैं।

महिला कैदियों में 31 से 50 आयु वर्ग आगे

राजधानी की जेलों में कुल 741 महिलाएं बंद हैं। इनमें से 453 महिलाएं, यानी 61 प्रतिशत से अधिक, 31 से 50 वर्ष की आयु वर्ग की हैं। आंकड़ों से साफ है कि महिला कैदियों में 30 वर्ष से अधिक उम्र की संख्या ज्यादा है।

अपराध की जड़ में बेरोजगारी और गरीबी

दिल्ली सरकार के एक पूर्व कानून सचिव ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में बताया कि बेरोजगारी, गरीबी और स्थिर आय का अभाव युवाओं को अपराध की राह पर ले जाने में बड़ी भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि दिल्ली की जेलों में बंद कई युवा जल्दी पैसा कमाने के लालच में अपराध की दुनिया में फंस गए। इनमें से अधिकांश आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से आते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह आंकड़ा न सिर्फ कानून-व्यवस्था, बल्कि शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सुधार की नीतियों पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।


Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Reply