हाल ही में ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि कोलंबियाई राष्ट्रपति के रवैये में नरमी आई है। ट्रंप का कहना है कि वेनेजुएला में अमेरिका की हालिया कार्रवाई के बाद पेट्रो का रुख “काफी बदला हुआ” नजर आ रहा है। इसके बावजूद दोनों नेताओं के बीच मतभेद पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। ट्रंप जहां रूढ़िवादी विचारधारा के नेता हैं, वहीं पेट्रो एक वामपंथी राष्ट्रपति हैं, और दोनों की बयानबाजी अक्सर तीखी व अप्रत्याशित रही है।
गुस्तावो पेट्रो ने हाल के दिनों में भी ट्रंप की आलोचना जारी रखी है। उन्होंने गाजा संकट को लेकर अमेरिकी नीति पर सवाल उठाए और वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी को “अपहरण” करार दिया। वॉशिंगटन रवाना होने से पहले पेट्रो ने बोगोटा में अपने समर्थकों से प्रदर्शन करने की अपील भी की, जिससे इस मुलाकात को लेकर राजनीतिक माहौल और गरमा गया है।
परंपरागत रूप से कोलंबिया अमेरिका का करीबी सहयोगी रहा है। बीते तीन दशकों में दोनों देशों ने मिलकर ड्रग तस्करी के खिलाफ अभियान, विद्रोही गुटों से निपटने और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग किया है। हालांकि, हाल के महीनों में रिश्तों में खटास देखी गई है। ट्रंप प्रशासन ने ड्रग तस्करी के संदेह में समुद्री इलाकों में सैन्य कार्रवाई तेज की, जिसमें कई लोगों की मौत हुई। इसके अलावा, अक्टूबर में ट्रंप प्रशासन ने पेट्रो, उनके परिवार और कोलंबिया सरकार के एक मंत्री पर प्रतिबंध भी लगाए थे।
बाद में पेट्रो की वॉशिंगटन यात्रा के लिए इन प्रतिबंधों में अस्थायी ढील दी गई। वेनेजुएला में अमेरिकी कार्रवाई और मादुरो की गिरफ्तारी के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया था, जिस पर ट्रंप ने पेट्रो को कड़ी चेतावनी भी दी थी। हालांकि, दोनों नेताओं के बीच हुई लंबी फोन बातचीत के बाद हालात कुछ हद तक सामान्य हुए और इसी के बाद ट्रंप ने पेट्रो को व्हाइट हाउस आने का निमंत्रण दिया।
अब यह देखना अहम होगा कि यह बैठक अमेरिका–कोलंबिया संबंधों में नई शुरुआत साबित होती है या फिर दोनों नेताओं के बीच वैचारिक टकराव एक बार फिर सुर्खियों में आता है।