गौरतलब है कि दिल्ली में आखिरी बार बिजली दरें सितंबर 2021 में तय की गई थीं, जबकि व्यावहारिक रूप से राजधानी में बिजली के रेट वर्ष 2014 से लगभग स्थिर बने हुए हैं। इस बीच बिजली वितरण कंपनियों (Discoms) का दावा है कि बीते दस वर्षों में बिजली खरीद की लागत 20 फीसदी से अधिक बढ़ चुकी है, लेकिन दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई।
DERC अध्यक्ष पद खाली, फिर भी प्रक्रिया जारी
DERC का अध्यक्ष पद पिछले साल जुलाई से रिक्त है। इसके बावजूद आयोग ने एक सार्वजनिक सूचना जारी कर बिजनेस प्लान रेगुलेशन को वित्त वर्ष 2026-27 तक बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है। इस पर आम जनता से 27 जनवरी शाम 5 बजे तक सुझाव और आपत्तियां मांगी गई हैं।
एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, बिजनेस प्लान रेगुलेशन 2023 को एक साल के लिए बढ़ाया जाएगा क्योंकि नए नियम अभी अंतिम रूप नहीं ले पाए हैं। इसके बाद Discoms को वर्ष 2026-27 के लिए अपने टैरिफ प्रस्ताव DERC के सामने रखने होंगे। आयोग का लक्ष्य जुलाई तक टैरिफ संशोधन की पूरी प्रक्रिया पूरी करना है।
कैसे तय होंगी नई बिजली दरें
बिजली दरें तय करने की प्रक्रिया विस्तृत और चरणबद्ध होती है। सबसे पहले सभी Discoms अपने अनुमानित खर्च, आय और प्रस्तावित दरों के साथ टैरिफ याचिका दाखिल करती हैं। इसके बाद DERC इन प्रस्तावों की जांच करता है, खर्चों का सत्यापन करता है और दक्षता लक्ष्यों का आकलन करता है।
इसके पश्चात प्रस्तावित टैरिफ सार्वजनिक किए जाते हैं, जिन पर उपभोक्ता, उद्योग संगठन और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन अपनी आपत्तियां और सुझाव दर्ज कर सकते हैं। सार्वजनिक सुनवाई के बाद सभी पक्षों की राय पर विचार कर DERC अंतिम टैरिफ ऑर्डर जारी करता है।
क्या महंगी होगी दिल्ली में बिजली?
सूत्रों के मुताबिक, फिलहाल यह साफ नहीं है कि बिजली दरें बढ़ेंगी या मौजूदा स्तर पर बनी रहेंगी। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि टैरिफ में लगातार देरी से अंततः उपभोक्ताओं पर ही बोझ बढ़ता है। जब दरें समय पर संशोधित नहीं होतीं, तो बढ़ती लागत का बोझ Discoms पर जमा होता रहता है, जिस पर ब्याज भी जुड़ता है। बाद में टैरिफ बढ़ने पर उपभोक्ताओं को यह पूरा बोझ चुकाना पड़ता है।
DERC की भूमिका और नुकसान के लक्ष्य
DERC बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण की दरें तय करने के साथ-साथ बिजली कंपनियों के प्रदर्शन मानक और निगरानी की जिम्मेदारी निभाता है। आयोग ने 2026-27 के लिए बिजली वितरण में नुकसान के लक्ष्य भी तय किए हैं। इनमें BSES राजधानी के लिए 6.4 फीसदी, BSES यमुना के लिए 6.2 फीसदी, टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड के लिए 5.5 फीसदी और NDMC के लिए 6.4 फीसदी का लक्ष्य शामिल है।
अब सभी की नजरें जुलाई पर टिकी हैं, जब यह तय होगा कि दिल्ली के बिजली उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी या उनकी जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।