Breaking News
ट्रेंडिंग न्यूज़देवरिया न्यूज़उत्तर प्रदेश न्यूज़राष्ट्रीय न्यूज़अंतर्राष्ट्रीय न्यूज़राजनीतिक न्यूज़अपराधिक न्यूज़स्पोर्ट्स न्यूज़एंटरटेनमेंट न्यूज़बिज़नस न्यूज़टेक्नोलॉजी अपडेट लेटेस्ट गैजेट अपडेटमौसम

‘समुद्र प्रताप’ से मजबूत हुई भारत की समुद्री सुरक्षा, 60% स्वदेशी तकनीक से बना तटरक्षक बल का सबसे बड़ा पोत बेड़े में शामिल

Published on: January 6, 2026
Strengthened by 'Samudra Pratap'
द देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली : भारत ने आत्मनिर्भर रक्षा क्षमताओं की दिशा में एक और अहम उपलब्धि हासिल की है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को भारतीय तटरक्षक बल (ICG) के बेड़े में स्वदेशी प्रदूषण नियंत्रण पोत ‘समुद्र प्रताप’ को शामिल किया। यह पोत 60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री और तकनीक से निर्मित है, जो ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान की बड़ी सफलता मानी जा रही है।
गोवा शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा निर्मित ‘समुद्र प्रताप’ को मुख्य रूप से समुद्री प्रदूषण नियंत्रण के लिए डिजाइन किया गया है, लेकिन यह खोज एवं बचाव अभियान (Search and Rescue), तटीय गश्त और समुद्री सुरक्षा जैसे अभियानों में भी समान रूप से सक्षम है। रक्षा मंत्री ने कहा कि एक ही प्लेटफॉर्म पर कई क्षमताओं का एकीकरण आज की समुद्री चुनौतियों की आवश्यकता है, जहां लचीलापन और तत्परता दोनों बेहद जरूरी हैं।
करीब 114.5 मीटर लंबा और लगभग 4,200 टन वजनी यह पोत 22 नॉट से अधिक की गति से चलने में सक्षम है, जिससे यह लंबी दूरी के अभियानों के लिए अत्यंत प्रभावी बन जाता है। राजनाथ सिंह ने इसे भारत की पहली स्वदेशी रूप से डिजाइन की गई प्रदूषण नियंत्रण वेसल बताते हुए कहा कि यह तटरक्षक बल के बेड़े का अब तक का सबसे बड़ा पोत है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि इस तरह के जटिल प्लेटफॉर्म में 60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग यह दर्शाता है कि भारत का डिफेंस इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम अब परिपक्व हो चुका है और जटिल निर्माण चुनौतियों से निपटने में पूरी तरह सक्षम है।
अपने संबोधन में उन्होंने समुद्री प्रदूषण को एक गंभीर वैश्विक चुनौती बताते हुए कहा कि इसका प्रभाव मछुआरों की आजीविका, तटीय समुदायों के भविष्य और आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा पर पड़ता है। ऐसे में ‘समुद्र प्रताप’ जैसे पोत समुद्री पर्यावरण की रक्षा में अहम भूमिका निभाएंगे।
राजनाथ सिंह ने तटरक्षक बल की सराहना करते हुए कहा कि उसने मछुआरों, किसानों और तटीय क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों के मन में सुरक्षा का भरोसा पैदा किया है। साथ ही उन्होंने कहा कि भारतीय तटरक्षक बल की मजबूती के कारण अब दुश्मन भी भारत की समुद्री सीमाओं की ओर देखने से पहले सौ बार सोचते हैं।
उन्होंने अंत में कहा कि समुद्र भारत की संस्कृति, अर्थव्यवस्था और भविष्य का आधार है। एक सुरक्षित और स्वच्छ समुद्र ही सुरक्षित व्यापार, सुरक्षित जीवन और सुरक्षित पर्यावरण की गारंटी दे सकता है। ‘समुद्र प्रताप’ जैसे प्लेटफॉर्म इस बात का प्रमाण हैं कि भारत अपनी समुद्री प्रतिबद्धताओं को निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

इसे भी पढ़ें :  वृंदावन में वैष्णव भक्ति और जैन तपस्या का संगम, प्रेमानंद जी महाराज से मिले विश्व शांति यात्रा पर निकले जैन मुनि

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Reply