पिछले साल सऊदी अरब के साथ द्विपक्षीय रक्षा समझौता करने के बावजूद पाकिस्तान सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के पक्ष में खुलकर सामने नहीं आ पा रहा। यमन में हालिया घटनाक्रम के दौरान पाकिस्तान ने केवल एक बार अप्रत्यक्ष रूप से सऊदी अरब का समर्थन किया, लेकिन न तो पाकिस्तानी सेना और न ही शहबाज शरीफ सरकार ने यूएई के खिलाफ सऊदी अरब का जमीन पर साथ दिया। इससे रियाद की नाराजगी की आशंका जताई जा रही है।
उधर, पाकिस्तान तुर्की के साथ भी सैन्य गठबंधन मजबूत करना चाहता है और उसकी इच्छा है कि तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच रक्षा सहयोग का हिस्सा बने। इसी बीच पाकिस्तान सूडान की सेना को करीब 1.5 अरब डॉलर के हथियार बेचने की तैयारी में है, जिनके इस्तेमाल की संभावना यूएई समर्थित रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (RSF) के खिलाफ बताई जा रही है। इससे स्थिति और जटिल हो गई है।
तालमेल की कोशिश, लेकिन हालात पेचीदा
तनाव के बीच प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से फोन पर बातचीत कर सऊदी अरब के साथ एकजुटता जताई। हालांकि, जब सऊदी सेना ने यमन में यूएई की सैन्य संपत्तियों पर हमला किया, उसी समय यूएई के राष्ट्रपति पाकिस्तान के अर्ध-आधिकारिक दौरे पर मौजूद थे, जिससे इस्लामाबाद की स्थिति और असहज हो गई।
इस दौरे के दौरान यूएई ने पाकिस्तानी सेना द्वारा संचालित फौजी फाउंडेशन में निवेश की घोषणा की। यूएई ने फौजी फाउंडेशन ग्रुप में करीब एक अरब डॉलर के शेयर खरीदने और दो अरब डॉलर के अतिरिक्त कर्ज को रोलओवर करने की योजना भी पेश की है।
कुल मिलाकर, सऊदी–यूएई खींचतान में पाकिस्तान संतुलन साधने की कोशिश कर रहा है, लेकिन दोनों पक्षों से जुड़े हितों के चलते उसके लिए किसी एक का खुला साथ देना आसान नहीं दिख रहा।