यह समझौता इसलिए भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है, क्योंकि रूस पारंपरिक रूप से भारत का करीबी सहयोगी रहा है, जबकि पाकिस्तान को लंबे समय से अमेरिका समर्थित खेमे में माना जाता है। ऐसे में रूस–पाकिस्तान के बढ़ते आर्थिक संबंध वैश्विक भू-राजनीति में नए संकेत दे रहे हैं।
EPC कॉन्ट्रैक्ट के बाद शुरू होगा निर्माण
पाकिस्तान के इंडस्ट्रीज सेक्रेटरी के अनुसार, इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) कॉन्ट्रैक्ट साइन होने के बाद ही निर्माण कार्य की शुरुआत होगी। उन्होंने बताया कि नवंबर 2025 में पाकिस्तान–रूस इंटर-गवर्नमेंटल कमीशन की बैठक के दौरान पाकिस्तान स्टील मिल्स को फिर से शुरू करने के लिए दूसरा प्रोटोकॉल साइन किया गया था। इसमें एक बैंकेबल EPC कॉन्ट्रैक्ट तैयार करने पर सहमति बनी थी। इस दिशा में आगे बढ़ते हुए रूस की कंपनी इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग LLC की एक टीम ने हाल ही में पाकिस्तान का दौरा कर स्टील मिल्स का टेक्निकल ऑडिट भी किया है।
भारी कर्ज में डूबी है पाकिस्तान स्टील मिल्स
पाकिस्तान स्टील मिल्स इस समय करीब 345 अरब रुपये के भारी कर्ज में डूबी हुई है। इसके बावजूद रूस ने इस संकटग्रस्त इकाई को फिर से चालू करने में दिलचस्पी दिखाई है। यदि रूसी सहयोग से PSM का पुनरुद्धार होता है, तो यह पाकिस्तान की कमजोर अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है।
PSM वर्ष 2015 से बंद पड़ी है। दशकों तक यह पाकिस्तान के सबसे बड़े औद्योगिक संस्थानों में से एक रही, लेकिन इसके बंद होने से हजारों लोगों की नौकरियां चली गईं। हालांकि, मिल के पुनरुद्धार में बड़ी चुनौतियां भी हैं—भारी कर्ज के साथ-साथ पुरानी तकनीक को आधुनिक बनाने की जरूरत होगी।
रूस–पाकिस्तान रिश्तों में नया मोड़
पाकिस्तान ने 2023 में पहली बार रूस से तेल आयात किया था, जिसे दोनों देशों के रिश्तों में एक अहम रणनीतिक कदम माना गया। इसके बाद से आर्थिक क्षेत्र में सहयोग लगातार बढ़ा है। फिलहाल ये संबंध मुख्य रूप से आर्थिक हैं, लेकिन भविष्य में इनके रक्षा सहयोग तक फैलने की संभावनाएं भी जताई जा रही हैं। रूस ने सिर्फ स्टील मिल्स ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान के रेलवे सेक्टर में भी निवेश में रुचि दिखाई है। बताया जा रहा है कि रूस, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के साथ मिलकर पाकिस्तान रेलवे में निवेश पर विचार कर रहा है।
कुल मिलाकर, पाकिस्तान स्टील मिल्स के पुनरुद्धार में रूस की भागीदारी न केवल पाकिस्तान की औद्योगिक क्षमता को नई ऊर्जा दे सकती है, बल्कि यह रूस–पाकिस्तान संबंधों की एक नई शुरुआत का भी संकेत है।