द देवरिया न्यूज़,देवरिया। शहर में पेयजल आपूर्ति को लेकर गंभीर खतरा सामने आया है। नगर क्षेत्र में करीब 17 स्थानों पर नालों के नीचे से पानी की पाइपलाइन गुजर रही है, जिससे पानी की शुद्धता पर सवाल खड़े हो गए हैं। यदि किसी भी जगह पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हुई, तो नालों का गंदा पानी सीधे शहर के हजारों घरों तक पहुंच सकता है। इंदौर की हालिया घटना के बाद नगरपालिका और जिला प्रशासन ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है।
शहर में जलकल विभाग की लगभग 200 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछी हुई है, जिसके जरिए करीब 40 हजार घरों में पानी की आपूर्ति की जाती है। यह पानी लोग पीने से लेकर खाना बनाने तक के लिए इस्तेमाल करते हैं। इनमें से लगभग 20 प्रतिशत पाइपलाइन जीआई और सीमेंटेड हैं, जबकि शेष पीवीसी पाइप से बनी हुई हैं। कई मोहल्लों को जोड़ने के लिए इन पाइपलाइनों को नालों के नीचे से क्रॉस कराया गया है, जो अब खतरे का कारण बन रही हैं।
सिविल लाइन क्षेत्र में नालों को क्रॉस करने वाली पाइपलाइनों की संख्या सबसे अधिक है। कलक्ट्रेट से लेकर गोरखपुर रोड ओवरब्रिज तक कई ऐसे स्थान चिन्हित किए गए हैं, जहां से होकर पेयजल पाइपलाइन नालों के अंदर से गुजर रही है।
इंदौर की घटना के बाद प्रशासन ने पूरे शहर में अभियान चलाकर ऐसी पाइपलाइनों की पहचान शुरू की है। अब तक 17 स्थानों पर नालों के भीतर से गुजर रही पाइपलाइन चिह्नित की जा चुकी हैं। नगरपालिका प्रशासन इन्हें नालों से बाहर निकालने की योजना पर काम कर रहा है।
बरसात में बढ़ जाता है खतरा
सामान्य दिनों में नालों में गंदे पानी का स्तर नीचे रहता है और पाइपलाइनें पानी से ऊपर रहती हैं। लेकिन बरसात के मौसम में नालों का जलस्तर बढ़ जाता है, जिससे पाइपलाइनें पूरी तरह गंदे पानी में डूब जाती हैं। ऐसे में यदि कहीं लीकेज हो जाए, तो दूषित पानी पाइपलाइन में प्रवेश कर सकता है, जिससे जलजनित बीमारियों के फैलने का खतरा काफी बढ़ जाता है।
प्रमुख सचिव ने दिए सख्त निर्देश
रविवार की शाम प्रमुख सचिव नगर विकास ने प्रदेशभर के नगर आयुक्तों और अधिशासी अधिकारियों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए बैठक की। उन्होंने नालों के साथ गुजर रही सीवेज लाइन और पेयजल पाइपलाइन की कड़ी निगरानी करने के निर्देश दिए। साथ ही नालों के अंदर से गुजर रही पाइपलाइनों की तत्काल पहचान करने को कहा।
प्रमुख सचिव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी स्थिति में दूषित पानी घरों तक नहीं पहुंचना चाहिए। इसके लिए पानी की नियमित जांच, टंकियों की साफ-सफाई और क्लोरिनेशन डोजर की अनिवार्यता सुनिश्चित की जाए। लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
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