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स्वदेशी आकाश-NG मिसाइल की ताकत बढ़ी, अब 50 किमी दूर तक दुश्मन पर सटीक वार

Published on: February 1, 2026
of indigenous Akash-NG missile
द देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली : अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों के माहौल में भारत लगातार अपनी रक्षा तैयारियों को मजबूत कर रहा है। इसी क्रम में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की स्वदेशी सतह-से-हवा मिसाइल प्रणाली आकाश-एनजी (Akash-NG) को लेकर बड़ी सफलता सामने आई है। आकाश-एनजी मिसाइल की मारक क्षमता बढ़ाकर अब 50 किलोमीटर कर दी गई है, जिससे देश की एयर डिफेंस क्षमता को बड़ा बल मिला है।

डीआरडीओ अधिकारियों के अनुसार, आकाश-एनजी की रेंज में यह बढ़ोतरी नए डुअल-पल्स सॉलिड रॉकेट मोटर की सफल टेस्टिंग के बाद संभव हो पाई है। इस उन्नत प्रोपल्शन तकनीक की मदद से मिसाइल अब पहले से कहीं अधिक तेज, सटीक और घातक हो गई है। इससे दुश्मन के फाइटर जेट, क्रूज मिसाइल और तेज रफ्तार ड्रोन जैसे हवाई खतरों को प्रभावी ढंग से नष्ट किया जा सकेगा।

आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (ARDE) के प्रमुख अंकाथी राजू ने बताया कि नई तकनीक के चलते आकाश-एनजी मिसाइल रडार पर पकड़ में आना भी मुश्किल होगी। डुअल-पल्स मोटर दो चरणों में थ्रस्ट प्रदान करती है, जिससे मिसाइल उड़ान के दौरान अपनी गति और नियंत्रण बनाए रखते हुए लक्ष्य तक पहुंचती है। यह बदलाव पुराने रैमजेट इंजन आधारित सिस्टम की तुलना में इसे कहीं अधिक सक्षम बनाता है।

हालिया परीक्षण के दौरान आकाश-एनजी मिसाइल ने 50 किलोमीटर की अधिकतम दूरी पर एक तेज गति वाले बंशी पायलटलेस टारगेट एयरक्राफ्ट को सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट कर नष्ट किया। बंशी ड्रोन का इस्तेमाल आमतौर पर क्रूज मिसाइलों और लो-लेवल उड़ान भरने वाले यूएवी जैसे कठिन लक्ष्यों के सिमुलेशन के लिए किया जाता है, जिससे इस परीक्षण की सफलता और भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, आकाश-एनजी मिसाइल प्रणाली को एसएएम (Surface to Air Missile) बैटरियों के साथ तैनात करने से सीमावर्ती क्षेत्रों और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा और मजबूत होगी। इसकी बढ़ी हुई रेंज और आधुनिक तकनीक भारत को हवाई सुरक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम है।

आकाश-एनजी की यह उपलब्धि ऐसे समय में सामने आई है, जब क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर सुरक्षा चुनौतियां बढ़ रही हैं। ऐसे में यह स्वदेशी मिसाइल प्रणाली न केवल भारतीय सशस्त्र बलों की ताकत बढ़ाएगी, बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ और रक्षा आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को भी मजबूती प्रदान करेगी।


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