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भारत–कनाडा संबंधों में नई गर्माहट: मार्च में पीएम मार्क कार्नी का भारत दौरा संभव, उससे पहले कनाडा जा सकते हैं NSA अजीत डोभाल

Published on: January 28, 2026
New warmth in India-Canada relations

द देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली : भारत और कनाडा के बीच बदले सियासी माहौल के बीच द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा मिलने के संकेत हैं। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी मार्च के पहले सप्ताह में भारत दौरे पर आ सकते हैं। इससे पहले भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल के फरवरी में कनाडा जाने की भी चर्चा है। कूटनीतिक और सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, ये दोनों यात्राएं भारत–कनाडा रिश्तों के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही हैं।

मार्क कार्नी के सत्ता संभालने के बाद दोनों देशों के संबंधों में स्पष्ट रूप से सुधार देखने को मिला है। आर्थिक, कूटनीतिक और रणनीतिक मुद्दों पर बातचीत के साथ-साथ भारत की आंतरिक सुरक्षा से जुड़े मामलों में भी कनाडा के साथ सहयोग को दोबारा मजबूत करने की कोशिशें तेज हुई हैं।

सुरक्षा और इंटेलिजेंस सहयोग पर जोर

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, NSA अजीत डोभाल की संभावित कनाडा यात्रा को इंटेलिजेंस और सुरक्षा सहयोग से जोड़कर देखा जा रहा है। कार्नी सरकार के गठन के बाद से दोनों देश काउंटर-टेररिज्म, संगठित अपराध और खुफिया जानकारी साझा करने जैसे विषयों पर सक्रिय संवाद में हैं। इसी क्रम में सोमवार को भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद से बातचीत की, जिसमें द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर सहमति बनी।

डोभाल–ड्रोइन बैठक से शुरू हुआ था सुधार का दौर

भारत और कनाडा के रिश्ते 2023 में खालिस्तानी अलगाववादी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद बेहद तनावपूर्ण हो गए थे। हालात इतने बिगड़ गए थे कि दोनों देशों के उच्चायोग भी अस्थायी रूप से बंद हो गए थे, जो अगस्त 2025 से दोबारा सक्रिय हुए।

पिछले साल सितंबर में कनाडा की सुरक्षा और खुफिया सलाहकार नथाली ड्रोइन ने नई दिल्ली का दौरा किया था। उस दौरान उनकी NSA अजीत डोभाल से विस्तृत बातचीत हुई थी। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस बैठक का मकसद बिगड़े हुए द्विपक्षीय संबंधों को पटरी पर लाना और आपसी विश्वास बहाल करना था।

काउंटर-टेररिज्म बना साझा एजेंडा

डोभाल और ड्रोइन के बीच हुई चर्चा में काउंटर-टेररिज्म और संगठित अपराध के खिलाफ सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी थी। दोनों देशों ने इंटेलिजेंस शेयरिंग को मजबूत करने और क्षेत्रीय व वैश्विक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर मिलकर काम करने का फैसला किया था। इसी पृष्ठभूमि में पहले डोभाल की कनाडा यात्रा और फिर प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के भारत आगमन को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कार्नी के आने से बदला माहौल

पिछले कुछ वर्षों में कनाडा पर भारत-विरोधी और खालिस्तानी तत्वों को पनाह देने के आरोप लगते रहे हैं। इससे दोनों देशों के रिश्ते ऐतिहासिक रूप से निचले स्तर पर पहुंच गए थे। खासकर जब तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रुडो ने निज्जर हत्याकांड में भारत की भूमिका को लेकर सार्वजनिक बयान दिया, तो कूटनीतिक तनाव और गहरा गया हालांकि, अप्रैल 2025 में मार्क कार्नी की चुनावी जीत के बाद स्थिति में बदलाव आया। जून 2025 में जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मार्क कार्नी की मुलाकात हुई, जिसके बाद सुरक्षा और रणनीतिक मुद्दों पर संवाद की नई शुरुआत हुई। अब डोभाल और कार्नी की संभावित यात्राओं को भारत–कनाडा संबंधों में विश्वास बहाली और सहयोग के नए अध्याय की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है।

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