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अजित पवार के निधन के बाद एनसीपी में सत्ता संग्राम, सुनेत्रा पवार डिप्टी सीएम के लिए चुनी गईं, शरद पवार फैसलों से रहे दूर

Published on: February 1, 2026
NCP after the death of Ajit Pawar

द देवरिया न्यूज़,मुंबई / पुणे : बारामती में 28 जनवरी की सुबह हुए एक दर्दनाक चार्टर्ड प्लेन क्रैश में महाराष्ट्र के पूर्व डिप्टी मुख्यमंत्री और एनसीपी के कद्दावर नेता अजित पवार के निधन के बाद राज्य की राजनीति में भूचाल आ गया। 29 जनवरी को 11 बजे राजकीय सम्मान के साथ हजारों समर्थकों की मौजूदगी में अजित पवार का अंतिम संस्कार किया गया। शोक और संवेदनाओं के बीच, अगले 48 घंटों में एनसीपी की राजनीति ने ऐसा मोड़ लिया, जिसने पार्टी के भविष्य और नेतृत्व को लेकर नई बहस छेड़ दी।

अजित पवार के निधन के बाद एनसीपी के नेतृत्व को लेकर अनिश्चितता बनी हुई थी। शुरुआत में पार्टी के दोनों धड़ों के संभावित विलय की चर्चाएं तेज थीं, लेकिन तेजी से बदले राजनीतिक घटनाक्रम ने इन अटकलों को पीछे छोड़ दिया। इसी बीच, एनसीपी विधायक दल की बैठक में अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार को डिप्टी सीएम पद के लिए नेता चुन लिया गया। इस फैसले ने सभी को चौंका दिया, खासकर इसलिए क्योंकि बारामती में मौजूद शरद पवार इन घटनाक्रमों से कथित तौर पर अनजान रहे।

सूत्रों के मुताबिक, इस त्वरित फैसले के पीछे पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल, छगन भुजबल और सुनील तटकरे की अहम भूमिका रही। बताया जाता है कि इन्हीं नेताओं ने रणनीति बनाकर सत्ता संतुलन को अपने पक्ष में मोड़ा।

शरद पवार की बैठक से अजित पवार परिवार की दूरी

अजित पवार के निधन के बाद राज्य सरकार ने तीन दिनों के राजकीय शोक की घोषणा की थी। 30 जनवरी तक सभी सरकारी कार्यक्रम स्थगित कर दिए गए थे, लेकिन राजनीतिक गतिविधियां लगातार चलती रहीं। इसी दौरान छगन भुजबल ने सार्वजनिक रूप से सुनेत्रा पवार को डिप्टी सीएम बनाने की बात कही। इसके साथ ही यह भी सामने आया कि अजित पवार के बड़े बेटे पार्थ पवार को डिप्टी सीएम पद खाली होने की स्थिति में राज्यसभा भेजे जाने की योजना पर विचार हो रहा है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, शुक्रवार शाम शरद पवार ने परिवार और पार्टी से जुड़े प्रमुख नेताओं की बैठक बुलाई थी। इस बैठक में एनसीपी के दोनों धड़ों के विलय और नई सरकार में जिम्मेदारियों को लेकर चर्चा होनी थी। सूत्र बताते हैं कि शरद पवार महायुति सरकार में अपने गुट के रोहित पवार समेत दो विधायकों को मंत्री पद दिलाने की रणनीति पर काम कर रहे थे।

हालांकि, इस बैठक में सुनेत्रा पवार और उनके बेटे शामिल नहीं हुए। वे शनिवार सुबह मुंबई पहुंच गए, जहां दोपहर बाद हुई एनसीपी विधायक दल की बैठक में सुनेत्रा पवार को सर्वसम्मति से नेता चुन लिया गया।

शरद पवार की खुली नाराजगी

तेजी से बदले हालातों पर शरद पवार ने आखिरकार चुप्पी तोड़ी और प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि 12 फरवरी को एनसीपी के दोनों गुटों का विलय होना तय था, लेकिन मौजूदा घटनाक्रम के बाद यह प्रक्रिया अधर में लटक गई है। शरद पवार ने यह भी कहा कि मुंबई में हो रहे फैसलों को लेकर उनसे कोई सलाह नहीं ली गई।

उन्होंने इशारों में साफ किया कि मौजूदा स्थिति को देखते हुए पार्टी में फैसले प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे जैसे नेता ले रहे हैं। शरद पवार के इस बयान के बाद एनसीपी के भीतर सत्ता संघर्ष और नेतृत्व को लेकर खींचतान और स्पष्ट हो गई है।

अजित पवार के अचानक निधन से उपजे इस राजनीतिक तूफान ने महाराष्ट्र की राजनीति को एक नए मोड़ पर ला खड़ा किया है, जहां आने वाले दिनों में एनसीपी की दिशा और दशा दोनों तय होती नजर आएंगी।

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